रविवार, 4 अप्रैल 2021

कैनेबिस इंडिका ( CANNABIS INDICA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

कैनेबिस इंडिका ( CANNABIS INDICA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विस्तार पूर्वक विश्लेषण-

  • देश तथा काल का अतिरंजित दिखना 
  • मानसिक भ्रम  
  • रोगी का वाक्य समाप्त नहीं कर पाना  
  • खोपड़ी की हड्डी में तकलीफ
  • सुजाक की प्रथम अवस्था 

" कैनेबिस इंडिका की प्रकृति "

ठंडक व खुली हवा से रोगी को आराम मिलता हैं । जबकि प्रातःकाल को, तम्बाकू से , शराब से व पेशाब करते समय रोगी की तकलीफे बढ़ जाती हैं । 

" देश तथा काल का अतिरंजित दिखना " 

कैनेबिस इंडिका भांग का नाम हैं। अर्थात यह भांग से बनी औषधि हैं। इस औषधि का मन पर असीम प्रभाव पड़ता हैं। रोगी को समीप की चीजे मीलो दूर दिखती हैं, अभी अभी किया हुआ कार्य न जाने कब का किया हुआ प्रतीत होता हैं। मकान में बैठा हुआ भी कहेगा की आसमान पर बैठा हूँ। अभी अभी भोजन खाकर भी कहेगा की भोजन किए महीनों हो गए। एक गज़ को एक मील और एक मिनट को एक दिन महसूस करता हैं। देश तथा काल के विषय में उसकी धारणा अतिरंजित तथा भ्रममूलक हो जाती हैं । 

" मानसिक भ्रम " 

देश और काल के विषय में तो रोगी का भ्रम विशेष रूप का होता हैं । लेकिन इसके अलावा भी उसका सारा जीवन भ्रम में ही होता हैं । वह खुद को राजा , मसीहा या कोई महापुरुष समझता हैं । वह सोचने में असमर्थ होता हैं, कभी कहता है, कि मैं मर गया हू , मुझे लोग जलाने के लिए ले जा रहे हैं । कभी कहता है कि मैं उड़ रहा हूँ । ऐसे रोगी को कैनेबिस इंडिका ठीक कर देती हैं ।

" रोगी का वाक्य समाप्त नहीं कर पाना "

जब रोगी  कोई वाक्य शुरू करता हैं, और आधा वाक्य पूरा करने से बाद आधी वाक्य भूल जाता हैं । और वह सोचने लगता हैं, कि वह क्या कहना चाहता हैं । इस असमर्थता के कारण वह चिल्लाता भी हैं । वह इस औषधि को लगातार कई दिन तक लेने से ठीक हो जाता हैं । 

" खोपड़ी की हड्डी में तकलीफ " 

रोगी को ऐसा महसूस होता है कि उसकी खोपड़ी की हड्डी एक बार खुलती हैं , एक बार बंद होती हैं । इसके बाद सिर के दाई तरफ़ दर्द होने लगता हैं । ऐसे लक्षणों में कैनेबिस इंडिका लाभप्रद होती हैं।

" सुजाक की प्रथम अवस्था "

सुजाक की प्रथम अवस्था में रोगी का इलाज कैनेबिस इंडिका या कैनेबिस सैटाइवा से किया जा सकता हैं । पेशाब में पीला पस आता हैं और पेशाब करने के बाद बूंद - बूंद टपकता हैं । पेशाब करने से पहले , करते समय , और पेशाब कर लेने पर मूत्र प्रणालिका में जलन होती हैं । गुर्दे में भी हल्का - हल्का दर्द होता हैं । इन लक्षणों में कैनेबिस इंडिका से लाभ होता हैं । सुजाक में जब लिंग अपने आप उत्तेजित हो जाता हैं, तो रोगी को अत्यंत दर्द होता हैं । यह औषधि सुज़ाक के रोगी के लिए लाभप्रद होती हैं ।

" कैनेबिस इंडिका की शक्ति " 

यह औषधि मूल अर्क , 6 , 30 , 200 व उच्च शक्ति में उपलब्ध हैं ।


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