गुरुवार, 25 मार्च 2021

कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस ( CACTUS GRANDIFLORUS ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस ( CACTUS GRANDIFLORUS ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विस्तार पूर्वक विश्लेषण -

  • ऐसा अनुभव जैसे हृदय को मुट्ठी से जल्दी - जल्दी दबाया और छोड़ा जा रहा हैं   
  • किसी भी अंग में जकड़न का अनुभव 
  • वात रोग या गठिया में जकड़न का अनुभव 
  • बायीं बाह का सुन्न हो जाना 
  • रक्त संचय के कारण विभिन्न अंगों से खून आना  
  • पेट, आंतो, हाथों, टांगों व सिर में स्पन्दन

" कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस की प्रकृति " 

खुली हवा से रोग में लक्षणों में कमी आती हैं। जबकि प्रातः दोपहर तथा सायं काल में, बायीं करवट लेटने से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।

" ऐसा अनुभव जैसे हृदय को मुट्ठी से जल्दी-जल्दी दबाया और छोड़ा जा रहा हैं " 

कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस हृदय रोग की प्रधान दवा हैं । रोगी को अनुभव होता हैं, कि उसका हृदय मुट्ठी में दबाया हुआ हैं, और जल्दी - जल्दी उसे दबाया और छोड़ा जा रहा हैं । हृदय में ऐसा दर्द होता हैं, कि वह समझता है कि उसका रोग असाध्य हैं । उसे मृत्यु डर लगने लगता हैं । रोगी उदास, अकेला व चुपचाप बैठा रहता हैं और किसी से बात नहीं करता । कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस में हृदय रोगी प्राय: रोया करता हैं और घुटन महसूस करता हैं । दिल के इस प्रकार के कष्ट में कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस औषधि उपयुक्त हैं। 

" किसी भी अंग में जकड़न का अनुभव "

जकड़न का अनुभव सिर्फ हृदय तक सीमित नहीं रहता हैं । रोगी किसी भी अंग में जकड़न अनुभव करे, तो कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस ही उत्तम दवा हैं । रोगी को अनुभव होता हैं, कि उसकी छाती लोहे की जंजीर से जकड़ी हुई है और सिर पर भारी बोझ रखा हो । यह जकड़न हृदय और छाती के अतिरिक्त मूत्राशय , गुदा , जरायु और योनि आदि किसी भी अंग में हो सकती हैं । हृदय की जकड़न , सिर का बंधे होने का अनुभव , छाती में वजन जिससे सांस लेने में कठिनाई , गले में जकड़न व ऐंठन तथा जरायु में ऐसी जकड़न कि मैथुन न कर सके।  इन सभी अंगों के जकड़न में कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस  उपयोगी औषधि हैं । 

" वात रोग या गठिया में जकड़न का अनुभव "

वात रोगों में रोगी को जोड़ों में ऐसे अनुभव होता हैं , मानो की पट्टी बंधी हुई हैं । इस प्रकार के अनुभव में जकड़न और दबाव महसूस होता हैं और दर्द की अनुभूति होती हैं । इस प्रकार के जोड़ों के जकड़न में कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस लाभप्रद होती हैं।

" बायीं बांह का सुन्न हो जाना "

हृदय के रोगों से बायीं बांह में ऐंठन और सुन्नपन आ जाता हैं । जो लोग गठिया या हिस्टीरिया से ग्रसित होते हैं, उनमें भी बायीं बांह में सुन्नपन के लक्षण पाए जाते हैं । बायीं बांह के सुन्नपन में कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस उपयोगी दवा हैं । 

" रक्त संचय के कारण विभिन्न अंगों से खून आना "

हृदय के रोगों से रक्त संचार विघटित हो जाता हैं। इस प्रकार अधिक रक्त संचय के कारण भिन्न - भिन्न अंगों से रक्त बहने लगता हैं । सिर में रक्त का संचय इतना हो जाता हैं, कि नाक से नकसीर और खांसने पर गले से खून आ जाता हैं । इनके अलावा जरायु व मूत्राशय से पेशाब में भी खून आ जाता हैं । बवासीर में भी मस्से खून से भर कर बड़े हो जाते हैं, इसलिये कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस खूनी बवासीर की भी महत्वपूर्ण दवा हैं । 

" पेट, आंतो, हाथों, टांगों व सिर में स्पन्दन "

पेट में , आंतों में, हाथों में , टांगों में और सिर में हृदय की नाड़ी का स्पन्दन अनुभव होना कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस औषधि का विचित्र लक्षण हैं । 

" कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस औषधि के अन्य लक्षण "

>> ग्यारह बजे रोग में वृद्धि -  प्रातः या सायं व दोपहर ग्यारह बजे रोगी के लक्षण बढ़ जाते हैं । छाती पर वजन की शिकायत होती हैं, ज्वर आता हैं या सुबह - शाम  ठंड सताने लगती हैं । 

>> मूत्र अवरोध - मूत्राशय में ऐसा संकुचन होता हैं, कि पेशाब नहीं निकलता हैं । कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस  में रक्त के थक्के आसानी से बन जाते हैं । शरीर में रक्त का संचार इतने जल्दी थक्कों में जम जाता हैं, कि रक्त संचार रूक जाता हैं । यदि मूत्राशय में रक्तस्राव हो जाए , तो उसके थक्के जम कर मूत्र मार्ग को रोक देते हैं, जिससे रोगी का मूत्र रूक जाता हैं ।

>> मासिक धर्म का कष्ट - मासिक धर्म के समय तंदुरुस्त व हृष्ट पुष्ट स्त्री का जरायु मार्ग इन रक्त के थक्कों से रुक जाता हैं और इन्हे बाहर धकेलने के लिए जरायु में ऐंठन पैदा हो जाती हैं , जो प्रजनन के समय के कष्ट के समान होती हैं । रोगिणी दर्द से चिल्लाती हैं और जब तक रक्त के थक्के बाहर निकल नहीं जाते तब तक उसे चैन नहीं पड़ता । अगर यह अवस्था गठिये के रोगी में हो तो कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस ही इस तकलीफ को दूर कर सकती हैं । ध्यान रखे कि कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस मुख्य तौर पर हृदय रोग की औषधि हैं और इसलिए रक्त से संबंधित रोगों में लक्षणों के अनुसार इसका प्रयोग होता हैं । 



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