बुधवार, 24 मार्च 2021

ब्रायोनिया ( BRYONIA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

ब्रायोनिया ( BRYONIA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विस्तार पूर्वक विश्लेषण-

  • जुकाम , खांसी , ज्वर आदि रोगों में 
  • हरकत से रोग में वृद्धि और विश्राम से रोग में कमी 
  • दर्द की तरफ लेटने से आराम  
  • श्लैष्मिक झिल्ली का खुश्क होना और थोड़ी- थोड़ी देर में पानी पीना 
  • मासिक धर्म बंद होने पर नाक या मुंह से खून आना और सिर दर्द होना 
  • सूर्योदय के समय सिर दर्द और सूर्यास्त के समय बंद हो जाना 
  • क्रोध व मानसिक लक्षणों से रोग उत्पत्ति
  • गठिये में गर्मी और हरकत से आराम

" ब्रायोनिया की प्रकृति "

दर्द वाली जगह को दबाने से, ठंडी हवा से, आराम करने से, गठिये में सूजन पर गर्म सेक करने से और हरकत से रोग के लक्षणों में कमी आती हैं । जबकि हरकत से रोग बढ़ भी जाता हैं, गर्मी से ठंड में जाने से, खाने के बाद, क्रोध से और स्राव के दब जाने से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।

" जुकाम, खांसी, ज्वर आदि रोगों में "

प्राय: रोगी को जुकाम , खांसी व ज्वर आदि रोगों में एकोनाइट या बेलाडोना दी जाती हैं । परन्तु रोग के आने और जाने की गति का लक्षण होता हैं । इस गति को ध्यान में रखते हुए ही औषधि का निर्वाचन होता हैं । इससे रोग के कुछ लक्षण दूर हो सकते है , लेकिन रोग नहीं । 

उदाहरणार्थ से समझते हैं- एकोनाइट का रोगी हृष्ट - पुष्ट होता हैं, लेकिन ठंड में जाने से उसे तेज जुकाम , खांसी या बुखार हो जाता हैं । और शाम को सैर पर निकलने से रात को तेज बुखार आ जाता हैं । बेलाडोना में भी ऐसा ही पाया जाता हैं , परन्तु उसमें सिर दर्द जैसे मस्तिष्क के लक्षण विशेष होते हैं । जबकि ब्रायोनिया में ऐसा नहीं होता । यदि रोगी ठंड में चला जाता हैं, तो उसमें लक्षण धीरे - धीरे प्रकट होते हैं । पहले दिन छींके आती हैं , दूसरे दिन नाक बहने लगता हैं , और तीसरे दिन बुखार आता हैं । बुखार जिस तरह धीरे - धीरे आता हैं, वैसे ही धीरे - धीरे ही जाएगा । इसीलिये टाइफॉयड़ में एकोनाइट या बेलाडोना नहीं दी जाती । औषधि देते हुए औषधि की गति और प्रकृति को समझना ज़रूरी होता हैं । रोग के लक्षणों और औषधि की गति तथा प्रकृति के लक्षणों में साम्य होना जरूरी हैं , तभी औषधि कारगर होगी । 

" हरकत से रोग में वृद्धि "

दर्द होने स्थिति में हरकत से रोग बढ़ता हैं । अगर रोगी लेटा हुआ है , तो आँख खोलने या आवाज़ सुनने तक से रोगी को कष्ट अनुभव होता हैं । वात रोग , गठिया , सूजन , गिर जाने से दर्द आदि में हरकत होने से रोग में वृद्धि होने पर ब्रायोनिया लाभ करती हैं । 

जब तक रोगी रात को लेटा रहता हैं तो दस्त नहीं आता , परन्तु सवेरे बिस्तर से हिलते ही उसे बाथरूम में जाना पड़ता हैं ।  टट्टी जाने को एकदम हाजत होती हैं । अधिक दस्त आते हैं और कई बार आते हैं । जब रोगी इस काम से फ्री हो जाता है तब वह शक्तिहीन होकर मृत प्राय पड़ा रहता हैं, थकावट से शरीर पर पसीना आ जाता हैं । जरा सी हरकत से रोग में वृद्धि होने पर उन्हें यह दवा ठीक कर देती है ।  

" दर्द की तरफ लेटने से आराम "

जिस तरफ भी दर्द होता हैं, उस तरफ का हिस्सा दबा होने से वहां हरकत नहीं होती इसलिये दर्द में रोगी को आराम मिलता हैं । जिस तरफ दर्द हो उस तरफ लेटने से आराम में ब्रायोनिया लाभदायक होती हैं।  

" श्लैष्मिक झिल्ली का खुश्क होना और थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीना " 

खुश्की के कारण रोगी के होंठ सूख जाते हैं और खून निकलने लगते हैं। होंठ और नाक की खुश्की इस कदर बढ़ जाती हैं, कि रोगी उन्हें नोचता कर खून तक निकाल लेता हैं । ब्रायोनिया में इसी खुश्की के कारण उसे प्यास बहुत लगती हैं । वह थोड़ी थोड़ी देर में अधिक मात्रा में ठंडा पानी पी जाता हैं। 

" श्लैष्मिक झिल्ली की खुश्की और कब्ज "

श्लैष्मिक झिल्ली की खुश्की का असर आंतो पर भी पड़ता हैं, जिससे रोगी को कब्ज़ रहती हैं । सूखा व सख्त  मल आता हैं और बहुत दिनों में टट्टी जाता हैं ।  भयंकर कब्ज को ब्रायोनिया ठीक कर देती हैं । 

" श्लैष्मिक झिल्ली की खुश्की और खुश्क खांसी "

श्लैष्मिक झिल्ली की खुश्की का असर फेफड़ों पर भी पड़ता हैं । खासते - खासते गला फटने लगता हैं , लेकिन कफ बाहर नहीं निकलता । ठंड से गरम कमरे में जाने से खांसी बढ़ने में ब्रायोनिया उत्तम औषधि हैं।  

" मासिक धर्म बंद होने पर नाक या मुंह से खून आना और सिर दर्द होना "

यह ब्रायोनिया का विलक्षण लक्षण हैं । अगर रोगिणी नाक या मुंह से खून निकलने की शिकायत करे , तो उसे यह पूछना चाहिए कि उसका मासिक धर्म तो बंद नहीं हो गया और इसके साथ ही सिर दर्द होने लगता हैं । तो वह ब्रायोनिया का रोगी हैं।

" सूर्योदय के समय सिर दर्द और सूर्यास्त के समय बंद हो जाना "

इसमें सिर दर्द सूर्योदय के साथ शुरू होता हैं और सूर्यास्त के बाद रूक जाता हैं । इसके साथ ब्रायोनिया के अन्य लक्षण भी हो सकते हैं ।  

" क्रोध व मानसिक लक्षणों से रोग उत्पत्ति " 

ब्रायोनिया में अनेक मानसिक लक्षण होते हैं । बच्चा क्रोध करता हैं, जो वस्तु मिल नहीं सकती उसके लिए जिद करने लगता हैं। और दे दी जाए तो लेने से इंकार करता हैं । ऐसी चीजों की मांग करता जो मिल नहीं सकती और मिलती है, तो फेंक देता हैं।

" गठिये में गर्मी और हरकत से आराम "

ब्रायोनिया का उपयोग गठिये में भी किया जाता हैं । ब्रायोनिया का रोगी ठंडी हवा पसन्द करता हैं और ठंडा कपड़ा ओढ़ना चाहता हैं । जबकि गठिये के दर्द मे अपनी प्रकृति के विरुद्ध उसे गर्मी से आराम मिलता हैं और रोगी आराम से लेटे रहना चाहता हैं।  गठिये के रोग में रोगी चलने - फिरने से ठीक रहता हैं, क्योंकि इस प्रकार उसके दर्द भरे अंगों को गति से गर्मी मिलती हैं । 

" ब्रायोनिया औषधि के अन्य लक्षण "

>> नौ बजे रोग में वृद्धि - ब्रायोनिया में ज्वर के लक्षण शाम को नौ बजे बढ़ता हैं । ज्वर आकर सर्दी लगना शुरु हो जाता हैं । 

>> रोगी खुली हवा चाहता हैं - ब्रायोनिया का रोगी कमरे के दरवाजे - खिड़कियां खुली रखना पसन्द करता हैं । क्योंकि बंद कमरा उसकी सांस फूलने लगती हैं और तकलीफें बढ़ जाती हैं ।  

>> सोने के बाद रोग वृद्धि - सोने के बाद रोग बढ़ जाना इसका व्यापक लक्षण हैं । क्योंकि खाना खाने के बाद उसकी तबीयत ठीक नहीं रहती हैं । 

>> दांत के दर्द में दबाने और ठंडे पानी से लाभ - दांत के दर्द में मुह में ठंडे पानी से लाभ होता हैं क्योंकि ब्रायोनिया ठंड पसंद करने वाली दवा हैं । जिधर दर्द हो उधर लेटने या  दबाने से आराम मिलता हैं । 

>> गर्म शरीर में ठंड से रोग में वृद्धि - शरीर गर्म हो जाने पर ठंडा पानी पीने या स्नान कर लेने से रोग बढ़ जाता हैं । जबकि ब्रायोनिया के रोगी को ठंड पसंद हैं ,  परन्तु अगर वह गर्मी से आ रहा हो और शरीर गर्म हो, तब ठंडा पानी पीने या ठंडे स्नान से रोग में वृद्धि हो जाती हैं । 

>> दायीं फलक में दर्द - दायीं छाती से पीट की तरफ दायें कन्धे की फलक में दर्द हो , तो ब्रायोनिया और चैलीडोनियम से लाभ होता हैं । दाएं फलक के नीचे के कोने के दर्द में चैलीडोनियम विशेष औषधि हैं ।   



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