शुक्रवार, 19 मार्च 2021

बैराइटा कार्बोनिका ( BARYTA CARBONICA ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

बैराइटा कार्बोनिका ( BARYTA CARBONICA ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग फायदों का वर्णन -

  • शारीरिक तथा मानसिक विकास का अभाव  
  • ग्रंथियों का बढ़ जाना , टॉन्सिल में सूजन 
  • वृद्ध पुरुषों में बच्चों सा आचरण 
  • वृद्ध पुरुषों की खांसी 
  • शीत प्रधान रोगी 

बैराइटा कार्बोनिका की  प्रकृति -  गर्मी से व एकांत में रहने से रोग के लक्षणों में कमी आती हैं। जबकि  सर्दी से, रोग वाली करवट सोने से व स्नान से परहेज करने पर रोग के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।

शारीरिक तथा मानसिक विकास का अभाव - यह  दीर्घकालिक तथा गंभीर क्रिया करनेवाली औषधि हैं । शरीर तथा मन की आन्तरिक तह तक प्रभाव डालती हैं । जब बच्चा कोई काम देर से सीखता हैं जैसे - देर से चलना , देर से पढ़ना लिखना , मानो की उसमें शारीरिक तथा मानसिक विकास अभाव हैं । लड़कियां 18-19 साल की हो जाने पर भी बच्चों सा व्यवहार करती हैं । विवाह हो जाने पर भी गृहस्थी के काम को समझ नहीं पाती । शारीरिक तथा मानसिक विकास की वह प्रक्रिया जो व्यक्ति को पुरुष अथवा स्त्री बनाती हैं , वह इन रोगियों में रुक जाती हैं ।  कभी कभी तो शरीर का एक अंग बढ़ता है और दूसरे नहीं । शारीरिक तथा मानसिक विकास के अभाव में बैराइटा कार्बोनिका उपयुक्त औषधि हैं।

ग्रंथियों का बढ़ जाना , टॉन्सिल में सूजन - इसके रोगी की ' ग्रंथियां '  बढ़ जाती हैं , सख्त हो जाती हैं , गले , जांघ और पेट में गिल्टियाँ पड़ जाती हैं । गलतिया बढ़ जाने और मांसपेशियों सूख जाने पर शरीर बौना हो जाता हैं। ऐसे रोगी को बैराइटा कार्बोनिका ठीक कर देती हैं ।  टांसिल पर इस औषधि का विशेष प्रभाव पड़ता हैं । जरा सी सर्दी लगने से ही टांसिल बढ़ जाती हैं । 

टांसिल में बैराइटा कार्बोनिका , बेलाडोना , हिपर तथा कैमोमिला की तुलनाबेलाडोना और हिपर मे टांसिल की उत्पत्ति एकाएक होती हैं । जिस रात सर्दी लगी उसी रात टांसिल सूज जाते हैं और पक भी जाता हैं । परन्तु बैराइटा कार्बोनिका में टांसिल उसी रात नहीं सूजता , उसे कुछ दिन लगते हैं और पकता भी  धीरे - धीरे हैं । कैमोमिला के टांसिल की सूजन से कान में दर्द होता हैं और गर्मी से आराम मिलता हैं व रोगी चिड़चिड़ा हो जाता हैं ।  

वृद्ध पुरुषों में बच्चों सा आचरण - इस औषधि मेम वृद्ध पुरुष बच्चों जैसा आचरण करते हैं । स्मरण शक्ति लुप्त हो जाती हैं , चलते हुए डगमने लगते हैं । बैराइटा कार्बोनिका के रोगी का सर्वांगीण विकास रुक जाता हैं - चाहे वह बच्चा, युवा या वृद्ध हो । जब सत्तर वर्ष का व्यक्ति बच्चे की तरह व्यवहार करने लगे हैं , तो समझ लेना चाहिये कि उसका शारीरिक विकास रुक गया है , तब उसे बैराइटा कार्बोनिका की जरूरत हैं।

वृद्ध पुरुषों की खांसी - बुढ़ापे में कई लोगों को ऐसी खांसी हो जाती हैं, जो उनका पीछा नहीं छोड़ती । छाती में घड़घड़ाहट होती हैं, तो बैराइटा कार्बोनिका लाभप्रद होती हैं। जब किसी 70-80 वर्ष के वृद्ध को हर समय छाती में खांसी की घड़घड़ाहट होती हो, जो गर्मी के दिनो मे ठीक रहे और सर्दी के दिनों में तकलीफ दे और कोई दूसरा लक्षण न हो तो ऐमोनियम कार्बोनिकम लाभप्रद होती हैं। 

शीत प्रधान रोगी - होम्योपैथिक में यह जानना बहुत आवश्यक होती हैं, कि रोगी शीत प्रधान है या ऊष्णता प्रधान । शीत प्रधान रोगी के लिये शीत प्रधान औषधि का निर्वाचन किया जाता है , ऊष्णता प्रधान रोगी के लिये ऊष्ण औषधि का । होम्योपैथिक में रोगी से बड़ी बारीकी से पूछा जाता हैं, कि तुम्हें ठंड पसन्द या गर्मी । तुम कमरे में आते ही खिड़की - दरवाजे खोलना चाहते हो या  बंद करना । यदि किसी रोग में दो औषधियों के सब लक्षण मिलते हो , परन्तु एक औषधि शीत प्रधान हो और दूसरी ऊष्णता प्रधान , तो औषधि का निर्वाचन शीत प्रधान रोगी के लिये शीत प्रधान और ऊष्णता प्रधान रोगी के लिये ऊष्णता प्रधान औषधि का निर्वाचन करना होता हैं ।  बैराइटा कार्बोनिका शीत प्रधान औषधि हैं । रोगी ठंड सहन नही कर सकता, शरीर को ढके रखना चाहता हैं । कमरे के खिड़की - दरवाजे बंद रखना चाहता हैं ।   

बैराइटा कार्बोनिका की शक्ति तथा प्रकृति - यह औषधि ३० , २०० की शक्ति में उपलब्ध हैं । यह शीत प्रधान औषधि हैं।


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