शनिवार, 6 मार्च 2021

आर्सेनिकम आयोडेटम ( ARSENICUM IODATUM ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

आर्सेनिकम आयोडेटम ( ARSENICUM IODATUM ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विस्तार पूर्वक विवरण-

  • नाक या कान से लगने वाला अत्यधिक पीला स्राव 
  • यक्ष्मा रोग की प्रारंभिक अवस्था 
  • आर्सेनिकम आयोडेटम के कारण शीत तथा आयोडीन के कारण ऊष्ण प्रधान प्रकृति 
  • हृदय के रोग में फायदेमंद

आर्सेनिकम आयोडेटम की प्रकृति- खुली हवा में रहने से रोग के लक्षणों में कमी होती हैं। शुष्क हवा में, बंद कमरे में रहने से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।

नाक या कान से लगने वाला अत्यधिक पीला स्राव - साधारण जुकाम तथा पुराने जुकाम में इस औषधि का विशेष लाभ होता हैं । इसका स्राव अधिक नीला - पीला व पस जैसा होता हैं । जहां लगता है वहां काटता हैं । जब जुकाम क्रोनिक हो जाए तब आर्सेनिकम आयोडेटम अच्छा काम करती है । 

यक्ष्मा रोग की प्रारंभिक अवस्था - यक्ष्मा प्रकृति के रोगियों के लिये यह विशेष उपयोगिता रखती हैं । रोगी को तुरन्त ठंड लगकर जुकाम हो जाती है और लगातार नाक की शिकायत बनी रहती हैं । टी ० बी ० के रोगी में रक्त हीनता व पीलापन पाया जाता हैं, वज़न कम होता जाता है ।  जब यक्ष्मा रोग की प्राथमिक अवस्था हो , दोपहर को तापमान बढ़ जाता हो , पसीना आता हो , शरीर क्षीण हो रहा हो , इनके साथ अतिसार की शिकायत हो और खांसी रहती हो तो यक्ष्मा के इलाज के लिये यह प्रसिद्ध औषधि हैं । 

आर्सेनिक के कारण शीत तथा आयोडीन के कारण ऊष्ण प्रधान प्रकृति - अगर ठंड ज्यादा न हो तो रोगी खुली हवा पसन्द करता है , कमरे का दरवाजा व खिड़कियां खुली रखनी चाहता हैं, वह ठंडा पानी भी पसन्द नही करता और स्नान करने से उसे ठंड लग जाती हैं। इस औषधि में आर्सेनिक और आयोडीन का मिश्रण हैं। इसलिये इसके कई रोगी आर्सेनिक के कारण शीत प्रधान , और आयोडीन के कारण ऊष्ण प्रधान होते हैं। इसलिये यह दवा शीत व गरम दोनों प्रकृति की है, परन्तु मुख्य रूप से यह गरम प्रकृति की औषधि हैं । 

हृदय के रोग में फायदेमंद - हृदय के रोगों में आर्सेनिक आयोडेटम व कैटिगस दोनों दवा उपयोगी मानी गई हैं। इस दवा से हर प्रकार हृदय के रोगी ठीक हो जाते हैं । 

आर्सेनिक आयोडेटम की शक्ति व प्रकृति - यक्ष्मा में इस दवा का प्रयोग 4x शक्ति से शुरु करना चाहिए , औषधि ताजी होनी चाहिए और रोशनी से बचाकर रखना चाहिए । साधारण रोगों में 2 या 3 शक्ति की दवा का प्रयोग करना चाहिए । यह औषधि ' गर्म' प्रकृति की हैं ।


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