बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

अर्जेन्टम मेटैलिकम औषधि ( ARGENTUM METALLICUM ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

अर्जेन्टम मेटैलिकम औषधि( ARGENTUM METALLICUM ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विस्तार पूर्वक वर्णन -

  • स्नायु, स्नायु परिवेष्टन, कुरकुरी हड्डियाँ पेशी बन्धनों पर क्रिया 
  • विद्यार्थियों, विचारको व व्यापारियों की मानसिक थकावट 
  • स्वर का लोप होना  
  • फेफड़े , गले , योनिद्वार , मूत्रद्वार , आँख से भूरे रंग का स्राव 
  • सोने पर बिजली के धक्के जैसा अनुभव  
  • बहुमूत्र , खुश्क मुख , भरपेट खाने के बाद भी भूख , गिट्टो में सूजन 
  • दुर्व्यसनों से नपुसंकता व स्वप्नदोष

" अर्जेन्टम मेटैलिकम औषधि की प्रकृति "


सिर लपेटने से, चलने - फिरने से , गति से रोग के लक्षणों मे कमी होती हैं। बोलने से , मानसिक श्रम से, दोपहर को,  ठंड से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।


" स्नायु, स्नायु परिवेष्टन, कुरकुरी हड्डियाँ पेशी बन्धनों पर क्रिया "


स्नायु जिस मार्ग से जाता है उस पर दर्द होता है । शरीर में अनेक स्थानों पर कुरकुरी हड्डियाँ होती है जिन्हें कार्टिलेज कहते हैं, इसमें इनमें दर्द होता हैं । जोड़ों की हड्डियों मे दर्द व गठिये में यह विशेष लाभ करती हैं । कई रोगियों के नाक के भीतर की हड्डी बढ़ जाती है जिससे सास लेने मे कष्ट होता हैं । सर्जन चिकित्सक इस हड्डी की सर्जरी करते हैं, परन्तु अर्जेन्टम मेटैलिकम से यह ठीक हो जाती हैं । जहाँ - जहाँ कार्टिलेज बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। वहाँ - वहाँ इस औषधि का प्रयोग होता है। कभी - कभी आँख की पलके भी मोटी हो जाती हैं,  हड्डी जैसी बन जाती हैं। उस रोग में भी इस औषधि से लाभ होता हैं। 


" विद्यार्थियों, विचारको व व्यापारियों की मानसिक थकावट "


इस औषधि की मुख्य विशेषता व लक्षण यह हैं कि इसका मानसिक शक्तियों पर प्रभाव पड़ता हैं । जैसे- इसमें रोगी की स्मरण शक्ति, विचार शक्ति का ह्रास होता हैं । विद्यार्थियों , विचारकों , पढने लिखने वाले , व्यापारी आदि जो लोग मानसिक श्रम करते हैं। इनकी विचार शक्ति इतनी गिर जाती हैं, कि वे थोड़ा सा मानसिक श्रम करते ही थक जाते हैं, उन्हें चक्कर आने लगते हैं । एक जवान आदमी मानसिक दृष्टि से इतना थका हुआ लगता हैं, कि मानो साठ साल का हो, ऐसे में इस औषधि का उपयोग उत्तम माना जाता हैं । 


" स्वर का लोप होना "


जब गला बैठ जाता हैं और बोलने व गाने से दर्द महसूस होता हो, तब इस औषधि से विशेष लाभ होता हैं । अगर वह जोर से बोलता हैं,  विद्यार्थी जोर से पढ़ता हैं, तो उसे ख़ासी आने लगती हैं। इन लक्षणों में यह औषधि लाभप्रद होती हैं । 


" फेफड़े, गले, योनिद्वार, मूत्रद्वार, आँख से भूरे रंग का स्राव "


इस औषधि के लक्षणों में श्लैष्मिक झिल्ली के स्थानों से जो स्त्राव निकलता हैं। वह गाढ़ा, चिकना तथा भूरे रंग का होता हैं । गले से भूरे रंग का कफ़ निकलता हैं। इसके अलावा योनिद्वार से, मूत्रद्वार से और आँख से भूरा स्त्राव निकलता हैं , यहाँ तक कि जख्मों से भी यह स्त्राव निकलता हैं । कभी कभी यह पीले रंग का भी हो जाता हैं। राजयक्ष्मा रोग में खांसने पर भी भूरे रंग का कफ निकलता हैं। बोलने, हंसने या गर्म कमरे में रहने से कफ बढ़ जाता हैं। यह खुश्क कफ रोगी को बार - बार खांसने से परेशान करता हैं। इस दवा के सेवन से यह तकलीफ ठीक हो जाती हैं । 


" सोने पर बिजली के धक्के जैसा अनुभव "


इस औषधि के बारे में इस बात पर बल दिया जाता हैं, कि रोगी जब सोने के लिये लेटता हैं तब सिर से पांव तक बिजली का  धक्का महसूस करता हैं । ये धक्के एक बार , दो बार , कभी - कभी सारी रात भी लगते रहते हैं । अंगों में फड़कन, ऐठन होती है इन लक्षणों में यह औषधि लाभ पहुँचाती हैं। 


" बहुमूत्र, खुश्क मुख, भरपेट खाने के बाद भी भूख, गिट्टो में सूजन "


बहुमूत्र रोग में जब मुख सूखा रहता हो , पेशाब बार - बार आता हो , भर पेट भोजन कर लेने के बाद भी भूख लगती हो और गिट्टो में सूजन रहती हो तो यह औषधि लाभदायक होती हैं। 


" नपुसंकता व स्वप्नदोष "


हस्तमैथुन जैसे आदि दुष्कर्मों से रोगी नपुंसक बन जाता हैं । और रोगी स्वप्नदोष का शिकार हो जाता हैं । इसमें यह दवा लाभप्रद होती है । 


" अर्जेन्टम मेटैलिकम औषधि के अन्य लक्षण " 


>> रोगी शीत प्रधान होता हैं, सर्दी से डरता हैं, गर्म कपड़े लपेटे रखता हैं। उसको दर्द में गर्म सेक से आराम मिलता हैं और सिर दर्द में कपड़ा बांधने से आराम मिलता हैं । 

>> इस औषधि का विशेष लक्षण यह है कि दोपहर को शिकायतें शुरु होती हैं । सिर दर्द भी ऐसे ही दोपहर को ठीक अपने समय पर होता हैं। 

>> आधा सिर दर्द - सिर के आधे हिस्से में दर्द होता हैं। सिर दर्द धीरे - धीरे शुरू होता हैं, परन्तु जब अपने शिखर पर होता हैं, तब एकदम समाप्त हो जाता हैं ।

>> पुरुषों में दायें पोते और स्त्रियों में बायें डिम्बकोश में कठोरता पायी जाती हैं। 

>> मृगी का रोगी मृगी के दौरे के उतरते ही कूद पड़ता हैं, जो भी निकट होता हैं उसे मारने लगता हैं । 


" अर्जेन्टम मेटैलिकम औषधि की शक्ति तथा प्रकृति "


अर्जेन्टम मेटैलिकम औषधि 6, 30, 200 की शक्ति में जाती हैं । यह शीत प्रकृति की औषधि हैं।


0 comments:

एक टिप्पणी भेजें