मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

एपिस मेलिफिका औषधि ( APIS MELLIFICA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

एपिस मेलिफिका औषधि ( APIS MELLIFICA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विषलेशणात्मक वर्णन - 

  • किसी भी अंग मे शोथ व सूजन
  • मधुमक्खी के डंक मारने जैसा दर्द और जलन 
  • प्यास न लगना 
  • मानसिक - आघात से उत्पन्न रोग 
  • पहले, दूसरे या तीसरे महीने गर्भपात की आशंका
  • ज्वर में शीतकाल में कपड़ा उतार फैकना और शीतकाल में प्यास लगना 
  • ज्वर में 3 बजे दोपहर जूडी से बुखार 

" एपिस मेलिफिका की प्रकृति "


ठंडी हवा से, ठंडे पानी से नहाने से और कपड़े उतार देने से रोगी के  लक्षणो में कमी आती हैं । जबकि गर्म कमरे में, आग के सेक से , सोने के बाद और तीन से छः बजे के बीच रोगी के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।


" किसी अंग में शोथ व सूजन "


गुर्दा, आँख आदि में होने वाले शोथ व सूजन में कारगर औषधि हैं। शोथ दायीं तरफ से बांयी तरफ की ओर होता हैं। यह औषधि मधुमक्खी के डंक से तैयार होती हैं । इसमें वे लक्षण होते हैं, जो मधुमक्खी के डंक में होते हैं । शोथ व सूजन इस औषधि का प्रमुख लक्षण हैं । यह शोथ सम्पूर्ण शरीर के भिन्न - भिन्न अंगों में हो सकती हैं । यह शोथ की बहुत ही कारगर औषधि हैं।


>> गुर्दे पर प्रभाव - वैसे तो एपिस मेलिफिका की शोथ किसी भी अंग में हो सकती हैं , लेकिन मुख्य तौर पर इसका प्रभाव गुर्दे पर पड़ता हैं। जिसके कारण शरीर मे जहाँ - जहाँ सेल्म हैं , वहा - वहा पानी भर जाने के कारण शोथ हो जाती हैं। जैसे- मुँह , जीभ और आँख की पलक सब सूज जाते हैं ।  


>> आँख का प्रदाह - आँख प्रदाह में मधुमक्खी के डंक मारने जैसी टीस हो तो इस औषधि का प्रयोग किया जाता हैं। 


" मधुमक्खी के डंक मारने जैसा दर्द और जलन "


मधुमक्खी के काटने जैसा शोथ होना , जहाँ काटा है, वहा दर्द व जलन होती हैं । इस जलन मे ठंडक से आराम मिलती हैं, इसलिये एपिस मेलिफिका की शोथ में रोगी गर्मी सहन नही करता , ठंडक चाहता हैं ।  


>> डंक चुभने जैसा दर्द , सूजन , जलन और ठंडक से आराम - इन लक्षणों में यदि पित्ती उछलना , चेचक , खसरा , कैन्सर , डिम्बकोष की सूजन आदि रोगों में क्यो न पायें इस औषधि से लाभ होता हैं । 


>> बाहरी त्वचा पर छोटी - छोटी फुन्सियाँ - हम अभी शरीर की आंतरिक झिल्लियों के प्रदाह के कारण रोगी के बार - बार चीख उठने का जिक्र करेंगे , परन्तु शरीर की बाहरी त्वचा पर भी एपिस मेलिफिका का प्रभाव हैं । जब शरीर पर छोटी - छोटी फुन्सियाँ हो जाती हैं, जिन्हे अंग्रेजी में " रेश " कहते हैं ।


अगर ये दिखें ना भी परन्तु त्वचा पर अंगुली फेरकर से उन्हें अनुभव किया जा सकता हैं । शरीर में यहाँ - वहाँ गांठे पड़ जाती हैं , जो कभी आती हैं कभी चली जाती हैं ।  और ये कभी - कभी शोथ का उग्र रूप धारण कर लेती हैं । इन लक्षणों में एपिस मेलिफिका उपयोगी होती हैं ।  


>> रह - रह कर रोगी का चीखना - मस्तिष्क के रोग में रोगी बेहोशी मे ऐसे चीख उठता हैं, जैसे किसी ने डंक मार दिया हो । एपिस मेलिफिका का जैसे शरीर की त्वचा पर शोथ होता हैं, वैसे ही शरीर की आन्तरिक झिल्लियों पर जो मस्तिष्क , हृदय , पेट आदि का आवरण करती हैं, उन पर भी शोथ का प्रभाव होता हैं, और इसलिए इन अंगों के आन्तरिक शोथ पर रोगी डंक मारने जैसा दर्द अनुभव करता है, जिससे वह चीख उठती हैं। 


" प्यास न लगना "


एपिस मेलिफिका के शोथ में प्यास नही लगती। इसमें जलन होती हैं, लेकिन प्यास न लगती,  यही इसका ' विलक्षण लक्षण ' हैं । 


" मानसिक आघात से उत्पन्न रोग "


डर , झुझलाहट औऱ ईर्ष्या आदि से उत्पन्न मानसिक आघात में , विशेषकर शरीर के दाएं भाग के पक्षाघात में इस औषधि का उपयोग लाभप्रद होता हैं । जैसे युवाओं का बच्चों की तरह बेमतलब बोलना व व्यवहार करना।  निरर्थक बात बोलते जाना इस औषधि का मानसिक  कारण होता हैं । 


" पहले, दूसरे या तीसरे महीने गर्भपात की आशंका "


गर्भवती स्त्री के पहले , दूसरे या तीसरे महीने अगर गर्भपात की आशंका हो , तो यह औषधि इस खतरे को दूर कर देती हैं । कभी - कभी दुर्घटना-वश या गर्माशय की कमज़ोरी के कारण गर्भपात होने की आशंका उत्पन्न हो जाती हैं । किसी भी गर्भपात की आशंका में यह औषधि गर्भपात की प्रवृत्ति को रोक देती हैं । 


" ज्वर में शीतकाल में कपड़ा उतार फैकना और शीतकाल में प्यास लगना "


यह इस औषधि का ' विलक्षण - लक्षण '  है कि ज्वर में शीतकाल में सब कपड़े उतार फेंकता हैं, और शीतकाल अवस्था में प्यास भी लगती हैं। जबकि इसमें प्यास न लगने का लक्षण होता हैं।


" दोपहर 3 बजे जूड़ी से बुखार आना "


इसके ज्वर में रोगी को दोपहर 3 बजे सर्दी लगकर बुखार आता हैं ।  ज्वर के इस लक्षण में एपिस मेलिफिका औषधि का उपयोग लाभप्रद होता हैं।


" एपिस मेलिफिका औषधि की शक्ति व प्रकृति "


शोथ के रोग में निम्न शक्ति तथा अतिसार और आँखों की बीमारी में 30 तथा ज्वर में 200 शक्ति का उपयोग किया जाता हैं । यह धीरे धीरे क्रिया करती हैं। इसलिये दवा को जल्दी नही बदलनी चाहिये । यह औषधि ' गर्म '  प्रकृति की हैं ।


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