रविवार, 7 फ़रवरी 2021

ऐमोनियम म्यूरियेटिकम ( AMMONIUM MURIATICUM ) व्यापक लक्षण, मुख्य रोग और फायदें

ऐमोनियम म्यूरियेटिकम ( AMMONIUM MURIATICUM ) व्यापक लक्षण, मुख्य रोग और फायदें , इसे ऐमोनिया म्यूर के नाम से भी जाना जाता हैं -

  • खांसी या छाती के दर्द में दोनों कन्धो के बीच ठंड का अनुभव होना 
  • कब्ज रहना
  • मांसपेशियों , पुट्ठो तथा जोड़ों में खिचाव या दर्द  रहना
  • मासिक स्त्राव लेटे रहने पर होना व खड़े होने पर बन्द हो जाना 
  • गले में दर्द होना 
  • गर्मी की लहरें तथा बुखार में गर्म लहर के साथ पसीना आना 
  • ऐमोनिया म्यूरियेटिकम की प्रकृति व शक्ति

" ऐमोनियम म्यूरियेटिकम औषधि की प्रकृति "


ठंड में रहने, खुली हवा में और  तेज चलने से रोग के लक्षणों में कमी आती हैं। प्रात: काल ( सिर तथा छाती के रोग का बढ़ना ), दोपहर ( पेट के रोग का बढ़ना ), सांयकाल ( त्वचा , ज्वर , अगो मे रोग का बढ़ना ),  कालान्तर में रोग का बढ़ना ।


" खाँसी या छाती के दर्द में दोनो कन्धो के बीच ठंड का अनुभव "


इस औषधि का मुख्य लक्षण दोनो कन्धो के बीच ठंड का अनुभव होना हैं । छाती में होने वाली दो तकलीफो ( खाँसी व छाती में दर्द ) में प्राय ऐसा अनुभव होता हैं । और दोनों कन्धो के बीच जलन का अनुभव हो तो वह लाइकोपोडियम और फॉसफोरस का लक्षण हैं। और दोनों कन्धो के बीच बर्फ का टुकड़ा रखा हुआ अनुभव होना  लेकनन्यिस का लक्षण होता हैं।


" कब्ज रहना "


इस औषधि में मल कठोर, खुश्क, टूट - टूट कर गिरता हैं और कठिनाई से निकलता है। कभी - कभी कॉस्टिकम की तरह मल आंव से लिपटा रहता हैं। कॉस्टिकम मे मलद्वार की पक्षाघात की सी हालत होने के कारण मल कठिनाई से निकलता है। 


कब्ज के विषय में यह भी जानना जरूरी हैं कि जितने म्यूरेट्म हैं उनमें मल खुश्क और कठोर होता हैं । जैसे- ऐमोनिया म्यूर , मैगनेशिया म्यूर , नैट्रम म्यूर सब में कब्ज़ और कठोर मल पाया जाता है । एमोनिया म्यूर में मल का रंग परिवर्तित होता रहता है । मल का रंग बदलते रहना पल्सेटिला में भी पाया जाता है , परन्तु ऐमोनिया म्यूर का रोगी ठंड पसंद नहीं करता, जबकि पल्सेटिला का रोगी ठंड को पसंद करता हैं । 


" कॉस्टिकम और ऐमोनिया में तुलना "


कॉस्टिकम में नसें खिंच जाती हैं और हाथ - पांव छोटे पड़ जाते हैं । लेकिन ऐमोनिया म्यूर में नसों में खिंचाव महसूस होता हैं, मानो नसें और मांसपेशिया छोटी पड़ गई हैं । परन्तु न तो हाथ - पांव छोटे पड़ते हैं, और नहीं नसें व मांसपेशियाँ ।


" मांसपेशियों , पुट्ठो तथा जोड़ों में खिचाव या दर्द  रहना "


इसका मांसपेशियों , पुट्ठो तथा जोड़ों में खिंचाव तथा दर्द की अनुभूति पर विशेष प्रभाव है । इस लक्षण में , गठिया तथा पुरानी मिचकोड के दर्द आदि में यह औषधि अच्छा काम करती हैं । रोगी को पुट्ठो में , मांसपेशियों में और जोड़ों में एक प्रकार का तनाव अनुभव होता हैं । जब मांसपेशियों में खिंचाव के कारण उनमें कार्य करने की असमर्थता का अनुभव हो तो इस औषधि का उपयोग किया जाता हैं। । 


" मासिक स्त्राव लेटे रहने पर होना व खड़े होने पर बन्द हो जाना "


मासिक स्त्राव लेटे रहने पर होना व खड़े होने पर बन्द हो जाने पर ऐमोनियम म्यूरियेटिकम दी जाती हैं । इन लक्षणों में इसके अलावा बोविस्टा तथा मैग कार्ब औषधियाँ भी दी जा सकती हैं। यदि रात को मासिक स्राव और दिन में बंद हो तो ऐमोनिया म्यूर, बोविस्टा और मैग कार्ब औषधि दी जाती हैं। यदि दिन को मासिक स्राव और लेटने पर बन्द हो तो कैक्टस , कॉस्टिकम और लिलियम औषधि दी जाती हैं । यदि मासिक स्राव सिर्फ लेटने पर होती हैं और चलने - फिरने से बन्द हो जाता हैं तो क्रियोजोट औषधि लाभप्रद होती हैं।


" गले में दर्द होना "


गले में ऐसा दर्द रहना जिसका कुछ अता - पता न चले तो ऐमोनियम म्यूरियेटिकम बहुत उत्तम औषधि हैं । खासकर ऐसी हालत में जिसमें जलन हो , गले मे चिपचिपा कफ, गले मे शोथ, थूक निगलने में कष्ट , बार - बार गले से कफ खास - खास कर निकालना और आवाज़ बैठ जाए, तो ऐसे रोगियों के लिए यह औषधि लाभप्रद हैं। जो रोगी खांसी के साथ कमजोर होते जाए और तपेदिक की तरफ बढ़ते जाए तो इस औषधि का उपयोग किया जाता हैं । 


" गर्मी की लहरें तथा बुखार में गर्म लहर के साथ पसीना आना "


रोगी महसूस करता हैं, कि शरीर की सब नसों में रुधिर उबल रहा हैं । शरीर की आभ्यन्तर झिल्लियो में जलन , उत्ताप तथा काटने का अनुभव होती हैं । रात के अन्तिम भाग में बहुत पसीना आता हैं । ज्वर में बार - बार गर्मी की लहरें आती हैं और हर गर्म लहर के बाद पसीना छूटता हैं, तो यह औषधि आराम पहुँचाती हैं।


" ऐमोनिया म्यूर की प्रकृति "


ऐमोनिया म्यूर का रोगी शरीर से कमजोर, टागें पतली और स्वभाव से आलसी होता हैं । ठंड तथा खुली हवा को बर्दाश्त नही कर पाता हैं। गर्मी की लहरें आती हैं तो उसे पसीना आ जाता हैं । इसमे मानसिक लक्षण कम होते हैं । परन्तु किसी - किसी व्यक्ति के प्रति वह घृणा प्रदर्शित करता सकता हैं । 


ऐमोनिया म्यूर के रोगी के रोग के लक्षणो मे वृद्धि की विलक्षणता यह होती हैं, कि उसके भिन्न - भिन्न अंगों के रोग बढ़ने का समय भिन्न - भिन्न है । उसके सिर तथा छाती के रोगों के लक्षण प्रातःकाल बढ़ जाते हैं , पेट के लक्षण दोपहर को और त्वचा , ज्वर तथा अन्य अंगों के रोगों के लक्षण सांयकाल को बढ़ते हैं । 


" ऐमोनियम म्यूरियेटिकम औषधि की शक्ति व प्रकृति "


ऐमोनिया म्यूर औषधि  3,6 व अधिक शक्ति में दी जाती हैं । इस औषधि की क्रिया दीर्घकालिक हैं । इस औषधि  की प्रकृति गर्म हैं।


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