रविवार, 20 दिसंबर 2020

एलूमेन ( ALUMEN ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

एलूमेन ( ALUMEN ) औषधि के व्यापक  लक्षण, मुख्य  रोग व फायदों का विस्तार से विश्लेषण

  • मलद्वार में लकवे जैसी कमजोरी होना
  • मूत्राशय में पक्षाघात जैसी कमजोरी 
  • शोथग्रस्त त्वचा , जिह्वा , गुह्यद्वार , जरायु या फोड़े का कड़ा पड़ जाना 
  • टाँसिल व स्तन ग्रंथियों का कड़ा पड़ जाना 
  • वृद्ध पुरुषों में खाँसी

एलूमेन औषधि की प्रकृति -  सिर दर्द में गर्मी से रोग व लक्षणों में कमी आती हैं। और ठंड से रोग में वृद्धि ( सिर दर्द को छोड़ कर क्योंकि सिर दर्द गर्मी से कम हो जाती है ), और निद्रा व दाई तरफ लेटने से रोग व लक्षणों में वृद्धि होती हैं।

मलद्वार में लकवे जैसी कमजोरी - एलूमेन औषधि में मलद्वार में ऐसी कमजोरी हो जाती है मानो पक्षाघात या लकवा हो गया हो । गुदा की क्रियाशीलता समाप्त हो जाती हैं, और मल गुदा में चिपकने लगता हैं । कोलन में से मल निकलता ही नहीं । जो मल निकलता है वह अत्यंत कठोर , सूखा व पत्थर की तरह गांठोवाला होता हैं । मल सप्ताह में एक बार या दो बार ही निकलता है । 

मूत्राशय में लकवा, पक्षाघात जैसी कमजोरी - जिस तरह मलद्वार शिथिल पड़ जाता है , उसी तरह मूत्राशय में भी  शिथिलता आ जाती है । मूत्र बड़ी कठिनाई से निकलता है । पेशाब कर लेने के बाद भी मूत्राशय भरा हुआ लगता है । शुरूआत में मूत्र निकलने में बहुत देर लगती हैं , और जब मूत्र  प्रारंभ होता हैं , तो मूत्र धार मूत्रनली से सीधे नीचे गिरता है , मूत्र में वेग बिलकुल भी नही होता । इस का कारण मूत्राशय की प्रणाली का पक्षाघात में यह औषधि कारगर होती हैं।

शोथग्रस्त त्वचा , जिह्वा , गुह्यद्वार , जरायु या फोड़े का कड़ा पड़ जाना  -इस औषधि में त्वचा के कड़ा पड़ जाने की प्रवृत्ति है । जहाँ त्वचा में शोथ होगी वहाँ  कड़ी पड़ जाएगी । जिन औषधियों में भी त्वचा में कड़ा पड़ जाने की प्रवृत्ति पायी जाती हैं , वहां कैंसर होने की संभावना  हो जाती हैं।  जब जख्म कड़ा पड़ने लगे तो समझ लेना चाहिये कि वह कैंसर में परिवर्तित हो रहा है । याद रखे कड़ापन बढ़ता - बढ़ता कैंसर बन जाता है । ऐसे जख्म त्वचा पर कही भी हो सकते है और जिह्वा , गुह्यद्वार , जरायु में भी हो सकते हैं । कड़ेपन का  शुरु में ही एलूमेन द्वारा उपचार कर लेने से रोगी कैंसर से बच सकता हैं । 

टाँसिल व स्तन ग्रंथियों का कड़ा पड़ जाना - शरीर की ग्रंथियों में  टाँसिल व स्तन आदि में गोली की तरह कड़ी पड़ जाती हैं तो यह औषधि लाभप्रद होती हैं । यह प्रवृत्ति विशेष रूप से टाँसिल में भी पायी जाती है । जिन लोगों में ठंड  टाँसिल में बैठ जाती है , तो वह टाँसिल को कड़ा कर देती हैं , तो ऐसे में एलूमेन लाभप्रद होती हैं।  टाँसिल के कड़ा होने की प्रवृत्ति बैराइटा कार्ब में भी पायी जाती हैं। और टाँसिल के कड़ापन में बैराइटा कार्ब भी उत्तम औषधि हैं । 

वृद्ध पुरुषों की खांसी - जिन वृद्ध पुरूषों की छाती में कफ जम जाता हैं और आसानी से नहीं निकलता हैं, लम्बी - लम्बी तार के रूप में निकलता हैं , तो यह औषधि उसे ठीक कर देती हैं । यह लक्षण एन्टिम टार्ट में भी पाया जाती हैं । 

एलूमेन औषधि की शक्ति व प्रकृति - यह औषधि 30, 200 व इससे अधिक शक्ति में उपलब्ध हैं । यह दीर्घकालिक एन्टी  सोरिक औषधि हैं । यह शीत प्रधान औषधि  हैं।


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