शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2020

एलियम सीपा ( ALLIUM SEPA ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग, उपयोग व फायदें

एलियम सीपा  ( ALLIUM SEPA ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग, उपयोग व फायदों का विश्लेषण-

  • शरीर की आन्तरिक झिल्ली का नवीन प्रदाह, जुकाम, नाक और आँख से पानी बहना 
  • जुकाम के कारण सिरदर्द 
  • ठंडे पानी से भीगने, कच्ची सब्जी व सलाद खाने से पेट दर्द 
  • कान का दर्द 
  • लम्बे डोरे की तरह होने वाला शियाटिका का दर्द 
  • किसी अंग के कटने के बाद नसों में दर्द होना

एलियम सीपा की प्रकृति- इस औषधि में ठंडे कमरे व खुली हवा मे रहने से रोग में कमी होती है। और बंद गरम कमरे व सांयकाल को रोग में वृद्धी होती है। 

शरीर के अगों की आन्तरिक झिल्ली का नवीन प्रदाह, जुकाम, नाक और आंख से पानी बहना - एलियम सीपा प्याज से बनी औषधि हैं। जब भी कच्चा प्याज को काटा जाता हैं, तब उसके रस से नाक तथा आँख से जुकाम की तरह पानी बहने लगता हैं। होम्योपैथिक के अनुसार जो औषधि जिन लक्षणों को स्वस्थ मनुष्य मे उत्पन्न करती हैं, उसी रोग में उन लक्षणों के विद्यमान होने पर सूक्ष्म मात्रा में देने से उन लक्षणों को दूर कर देती हैं। 

>> नाक से बहने वाला पानी, जिस स्थान पर बहे वही पर लगना इसका मुख्य लक्षण हैं- इसके जुकाम का मुख्य लक्षण यह हैं, कि नाक का पानी होटों पर बहता है वही लग जाता हैं, जलन पैदा करता हैं, और उस जगह को लाल कर देता हैं। इसमे आँख से भी पानी निकलता हैं, परन्तु नाक का पानी लगता हैं, आँख से निकलने वाला पानी गाल पर लगता नहीं। जुकाम में इसकी तुलना युफ्रेशिया से की जा सकती हैं। 

>> एलियम सीपा का जुकाम नाक पर लगता हैं, आँख पर नहीं, जबकि युफ्रेशिया का जुकाम आँख पर लगता हैं, नाक पर नहीं - एलियम सीपा और युफ्रेशिया दोनो के जुकाम मे आँख तथा नाक दोनो से पानी बहता हैं, परन्तु दोनो में यह प्रक्रिया विपरीत होती हैं। एलियम सीपा के जुकाम का पानी नाक पर चिरमिराता हैं, आँख का पानी आँख को नहीं चिरमिराता, जबकि युफ्रेशिया के जुकाम का पानी आँख को चिरमिराता हैं, नाक को नहीं । 

>> जुकाम का बाई नाक से शुरू होकर दाई तरफ जाना - एलियम सीपा का जुकाम बाई नाक की तरफ से शुरु होता हैं और उसमें चिरमिराने वाला पानी बहता हैं, नाक भर जाती हैं, और लगभग 24 घंटों के भीतर यह हालत दायी तरफ हो जाती हैं। 

जुकाम के कारण सिर दर्द -  इसका रोगी खुली हवा और ठंड पसन्द करता हैं। जबकि बन्द कमरे में उसकी शिकायतें बढ़ जाती हैं, और सांयकाल में भी उसके रोग में वृद्धि होती हैं। इसके कारण एलियम सीपा के रोगी को जुकाम के साथ सिर दर्द भी होता हैं। इसी सिर दर्द के कारण रोगी ठंडी हवा पसन्द करता हैं। और गरम कमरे में आते ही उसका सिर दर्द फिर से शुरू हो जाता हैं । युफ्रेशिया और पल्सेटिला में भी गरम कमरे में तकलीफे बढ़ जाती हैं। परन्तु युफ्रेशिया के जुकाम में पनीला जुकाम और आँख में चिरमिराहट होती हैं, जबकि पल्सेटिला के जुकाम में पीला, गाढ़ा जुकाम होता हैं । 

मासिक धर्म के शुरुआत में सिर दर्द में आराम और अंत में वापिस सिर दर्द शुरू होना- स्त्रियों में  मासिक धर्म शुरु होने पर सिर दर्द बन्द हो जाता हैं, और मासिक धर्म बन्द होने पर सिर दर्द फिर शुरु हो जाना एलियम सीपा का लक्षण हैं। लैकेसिस और जिंकम में भी यह लक्षण पाया जाता हैं। लैकेसिस का इस लक्षण के साथ मुख्य लक्षण सोने के बाद तकलीफ़ का बढ़ जाना हैं, और जिंकम का मुख्य लक्षण स्नायु रोग और मेरुदण्ड के रोगों से पीड़ित होना हैं । वैसे लैकेसिस तथा जिंकम मेटेलिकम में रजोधर्म शुरु होने पर सिर दर्द या अन्य दर्द ठीक हो जाते हैं । सिर्फ इस एक लक्षण पर औषधि का निर्णय कर देना उचित नही हैं । होम्योपैथिक में रोगी के अधिक से अधिक लक्षण, औषधि के अधिक से अधिक लक्षणों के साथ मिलने चाहिए, यही औषधि के चुनने का उचित प्रकार है । 

ठंडे पानी से भीगने, अधिक खाने , कच्ची सब्जी या सलाद खाने से पेट दर्द - पैर के भीग जाने से कभी - कभी ठंड लग जाने पर पेट दर्द हो जाता हैं,और अधिक खाने से या खीरा तथा अन्य कच्ची सब्जी खाने से पेट दर्द हो जाता हैं। यदि बैठे रहने से यह दर्द बढ़ता हैं, और घूमने - फिरने से घटता हैं , तो एलियम सीपा उत्तम व कारगर औषधि हैं। 

कान का दर्द - कान के दर्द में तीन प्रकार की औषधि जैसे- एलियम सीपा, पल्सेटिला , कैमोमिला । यदि जुकाम की वजह से कान में दर्द हो, तो एलियम सीपा इस दर्द को शान्त कर देती हैं । यह औषधि कान के दर्द में अति लाभप्रद मानी जाती हैं । पल्सेटिला कर्ण शूल की प्रसिद्ध औषधि हैं, इसका कान के साथ विशेष महत्व हैं। जब बच्चा तेज कान के दर्द से कराह रहा हो, तो ऐसे कोमल स्वभाव वाले बच्चों के कान के दर्द में पल्सेटिला अद्भुत काम करती हैं । जो बच्चे में कान के दर्द से चिड़चिड़ापन हो, तो उनके लिये  कैमोमिला उपयुक्त औषधि मानी गई हैं।  

लम्बे डोरे की तरह होनेवाला शियाटिका का दर्द - चेहरा , सिर , गर्दन और छाती में कभी - कभी स्नायु ( नस ) में दर्द होता हैं, जो लम्बे डोरे की नस की तरह प्रतीत होता हैं। इस तरह का दर्द शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है । 

किसी अंग के कटने के बाद नसों में दर्द -यदि किसी कारणवस शरीर का कोई अंग कट जाता हैं या काटना पड़ जाता हैं , तो कभी - कभी किसी भी नस में भयंकर शूल हो जाता है, असहनीय वेदना होती हैं। यह औषधि ऐसे दर्द में लाभप्रद होती अर्थात दर्द को शान्त कर देती है । 

एलियम सीपा औषधि के अन्य लक्षण -

>> यदि रोगी को कच्चा प्याज खाने की तीव्र इच्छा हो, दूसरा कोई पौष्टिक आहार न ले सके, तो यह भी इस औषधि का एक लक्षण हैं । 

>> ऐसी खाँसी जिसमे रोगी खाँसते - खाँसते गला पकड़ लेता हैं और महसूस करता हो कि गला अन्दर से पका पडा है। तो यह औषधि लाभ पहुँचाती है।

एलियम सीपा औषधि की शक्ति तथा प्रकृति - यह एकोनाइट की तरह थोड़ी देर काम करने वाली ' स्वल्प कालिक ' औषधि है । यह 3, 6, 30 और अधिक शक्ति में उपलब्ध हैं और यह उष्ण प्रधान प्रकृति की औषधि हैं।


0 comments:

टिप्पणी पोस्ट करें