रविवार, 11 अक्तूबर 2020

एक्टिया रेसिमोसा या सिमिसिफ्यूगा के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग, गुण व फायदे

एक्टिया रेसिमोसा या सिमिसिफ्यूगा के व्यापक-लक्षण तथा मुख्य - रोग, गुण व फायदे विस्तार से जानते है- 

  • स्त्री रोग हिस्टीरिया में, 
  • मासिक धर्म तथा जरायु रोग में , 
  • शारीरिक लक्षणों के दबने के बाद मानसिक लक्षण उत्पन्न में, 
  • तीसरे महीने में गर्भपात होना पर, 
  • गठिया ( मासपेशियों, जोडो, सिर व जरायु मे दर्द )
  • एक्टिया रेसिमोसा या सिमिसिफ्यूगा औषधि की प्रकृति
  • गर्म कपड़े पहनने से रोग मे कमी
  • खाने से रोग मे कमी व लक्षणो मे वृद्धि 
  • मासिक धर्म के दिनों मे रोग - वृद्धि
  • जितना अधिक मासिक स्राव, उतना क्लेश बढ़ना 
  • ठंड से रोग का बढ़ना 

इस औषधि की परीक्षा बहुत सीमित में है, परन्तु फिर भी कई रोगों मे यह औषधि लाभप्रद होती है । इसका मुख्य उपयोग स्त्रियो रोगो के उपचार में किया जाता है जिनमे से मुख्य रोग हिस्टीरिया तथा गठिया आदि वात - रोग मुख्य हैं । हम इन पर  विस्तार से चर्चा  करते है । 

हिस्टीरिया के लक्षण - सोते समय मासपेशियो में कंपन्न अनिद्रा - इस रोग से ग्राषित स्त्री बिस्तर पर जिस तरफ लेटती है , उसी तरफ मासपेशियो में कंपन्न होने लगता है । अगर वह पीठ के बल लेटती है तो पीठ और कन्धो की मांसपेशियों में कंपन्न व बेचैनी होना शुरू हो जाता है और दायें , वायें , सीधे - जिस तरह भी वह सोए उसे कंपन्न औए बेचैनी होती है । यह इस औषधि का विलक्षण है । 

मासिक धर्म के समय लक्षणों मे वृद्धि - मासिक धर्म के समय रोगिणी से पूछना चाहिये कि उसके लक्षण मासिक धर्म से पहले या मासिक धर्म के समय बढते हैं ।  मासिक धर्म के बाद स्त्रियों की तकलीफें घट जाती है , परन्तु ऐक्टिया रेसिमोसा यह विशेष लक्षण यह है कि जब मासिक धर्म हो रहा हो, तब स्त्री की तकलीफें बढ़ जाती हैं। और जितना ही अधिक रुधिर होता है उतनी ही तकलीफ होती है । मासिक धर्म के दिनो मे स्त्रिया उदासीन, रुआई, अविश्वासी व बेचैन होती है । इन लक्षणों यह औषधि लाभप्रद होती है और मासिक धर्म के होने से स्त्री की सब तकलीफ़े ठीक  हो जाते हैं । जबकि  लेकेसिस और जिफम मे ठीक इसकी उल्टी प्रतिक्रिया होती है । 

शारीरिक - लक्षणों के दबने पर मानसिक - लक्षणों का प्रकट होना तथा मानसिक - लक्षणों के दबने पर शारीरिक - लक्षणों का प्रकट होना ( Metastasis ) -कभी - कभी रोगी के शारीरिक - लक्षणों को तेज़ दवाओं का प्रयोग कर दबा दिया जाता है , परन्तु इससे मानसिक लक्षणों की उत्पत्ति हो जाती हैं । यह इस औषधि का लक्षण है, इसे कुछ उदाहरणार्थ समझते हैं - 

अगर गठिये रोग को दबा दिया जाता है, तो रोगी का मानसिक सन्तुलन बिगड़ जाता है , लेकिन कमी - कभी गठिया ठीक भी हो जाता है और मानसिक सन्तुलन भी बना रहता है। परन्तु दस्त की समस्या, पेट मे दर्द , स्त्रियों में जरायु से रुधिर आने जैसी समस्याएं होने  लगती है । इस प्रकार के स्रावो का प्रवाह रोग को शांत रखने का काम करते है , अगर यह स्त्राव - प्रवाह रुक जाए , तो रोगी अशांत, चित और मायूस रहता है ।  

ऐक्टिया रेसिमोसा की रोगिणी कहती है कि उसके सारे शरीर मे दर्द होता है , जिस तरफ भी लेटे उस तरफ की मांसपेशिया फडकने लगती हैं , इस कारण वह रात को सो नही पाती और वह उठ बैठती है। अगले दिन वह अपने शारीरिक कष्ट बारे में कोई बात नही करती, सिर्फ इतना कहती है कि उसका जी घबरा रहा है, कुछ करने का मन नहीं करता, रो रोकर दिल हल्का करना चाहती हैं । शारीरिक लक्षणों के बाद मानसिक लक्षण और मानसिक लक्षणों के बाद शारीरिक लक्षणों में परिवर्तन ही इस दवा का लक्षण व गुण हैं। इन लक्षणों में यह औषधि बहुत ही कारगर होती हैं ।

ऐक्टिया रेसिमोसा व पल्सेटिला तुलनात्मक विश्लेषण - ऐक्टिया रेसिमोसा के जैसा लक्षण, पल्सेटिला में भी पाया जाता है, पर दोनों में यह फर्क है, कि एक्टिया रेसिमोसा शीत प्रधान औषधि है, पल्सेटिला उष्ण प्रधान औषधि हैं। पल्सेटिला में बीमारी सिर्फ स्थान बदलती है, रूप नहीं । यदि घुटने में कोई दर्द है, तो वह दर्द दूसरे घुटने, भौह या अन्य किसी भी स्थान पर जा सकता है, लेकिन दर्द वैसा ही रहेगा जैसा था, कोई रूप नहीं लेगा। ऐक्टिया रेसिमोसा में दर्द एक मानसिक रूप लेता है जैसे - उदासी, निराशा, रोना आदि। 

इस दृष्टिकोण से ऐक्टिया रेसिमोसा और एब्रोटेनम की तुलना भी की जा सकती है, लेकिन एब्रोटेनम में एक शारीरिक लक्षण दब कर दूसरा शारीरिक लक्षण उत्पन्न होते हैं, मानसिक लक्षण नहीं। उदाहरणार्थ जैसे - एब्रोटेनम में दस्त दबकर गठिया या बवासीर हो जाएगा और कर्णमूल दबकर पोते बढ़ जाएंगे। ऐक्टिया रेसिमोसा का एब्रोटेनम की तुलना में मन व स्नायु मण्डल प अधिक प्रभाव होता हैं।

ऐक्टिया रेसिमोसा और इग्नेशिया की तुलनात्मक विश्लेषण - इग्नेशिया में भी लक्षणों में परिवर्तन पाया जाता हैं यह भी शीत प्रधान औषधि है।  इग्निशिया में बीमारी दुख के कारण होती हैं जैसे- किसी का पति मर गया हो, किसी की पत्नी मर गई हो, या अत्यन्त प्रेम से व्याकुल हो। इस प्रकार दु:ख से उत्पन्न रोगों में इग्नेशिया कारगर होती हैं ।

तीसरा महीने गर्भपात और सहज प्रसव - यदि जिन महिलाओं को हर तीसरे महीने गर्भपात हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में उन गर्भावस्था महिला को ऐक्टिया रेसिमोसा 3x हर तीन घंटे बाद देना चाहिए । सैबाइना भी तीसरे महीने के गर्भपात को रोकता है। यदि जिन महिलाओं का गर्भपात पाँचवे या सातवें महीने में होता है, तो सीपिया 30 की प्रति चार घंटे में सेवन करने से गर्भपात नही होता । जिन महिलाओं को प्राकृतिक ही गर्भपात हो जाता है, उन्हें वाइबरनम की 4-5 बूंद प्रतिदिन दिया जाना चाहिए। ऐक्टिया रेसिमोसा के सेवन से प्रसव क्रिया सहज होती हैं और अन्तिम दिनों में सेवन से प्रसव पीड़ा मे कमी आती हैं । कॉलोफाइलम दवा लॉ पावर में प्रसव से एक माह पूर्व से प्रतिदिन देने से प्रसव पीड़ा में कमी आती हैं और प्रसव आसानी हो जाता हैं ।  

गठिया - इसके रोगी शीत प्रधान होते हैं, उनके शरीर में गठिया रोग ठंड के कारण उत्पन्न होते है। इसके रोगी की केवल मांसपेशियाँ और जोड़ों में ही नही बल्कि नसों में, स्नायु मार्ग में,यकृत व जरायु में लगभग शीत से पूरे शरीर में दर्द होता है। लेकिन सिर में वह ठंडी हवा चाहता है। 

शीत प्रधान रोगी - यह रोगी का 'व्यापक' रूप हैं और सिर में ठंडी हवा की इच्छा - यह रोगी का 'अकागी' रूप है। यह पहले ही कहा जा चुका है कि जब रोगी का शारीरिक दर्द दब जाता हैं, तो फिर मानसिक लक्षण प्रकट हो जाते हैं। और मानसिक लक्षण प्रकट होने से शारीरिक लक्षण दब जाते हैं। इस दृष्टिकोण से इसे 'मूर्छा व वात ग्रस्त प्रकृति' का एक रोगी कहा जा सकता है। 

इस दवा के अन्य लक्षण 

1. प्रसव के बाद ठंड लग जाने से पागलपन जैसी हरकते व डिलीरियम हो जाना। 

2. प्रसव के बाद जरायु के नियमित सकोचन के न होने से मैले पानी न निकलने पर इस औषधि को दिया जाता है। 

3. जरायु मे अगर दर्द कभी इस और कभी उस ओर होता है, तो इस औषधि की सेवन की सलाह दी जाती है। यदि यह दर्द दाईं तरफ से बाई तरफ जाए तो लाइकोपोडियम दी जाती है और यदि बाई ओर से दाई तरफ जाए तो इपीकाक या लेकेसिस लेने की सलाह दी जाती है  जाता है। 

4. मासिक धर्म की खराबी के कारण स्नायु शूल मे लाभदायक होती है। 

5. एक्टिया रेसीमोसा का सिर दर्द आँख से शुरू होकर सिर की चोटी या गुध्दी तक फैला होता है। और स्पाइजेलिया का सिर दर्द इसका ठीक विपरीत होता है। एक्टिया रेसीमोसा का सिर दर्द रात से अधिक होता है, जबकि  स्पाइजेलिया  सिर दर्द दिन को अधिक होता है, सूर्योदय से शुरू होकर सूर्यास्त तक बना रहता है। और यदि प्रतिदिन दर्द एक ही समय बाई आँख के ऊपर हो तो सिड्रन बहुत ही उपयोगी साबित होती है । 

एक्टिया रेसीमोसा की पावर प्रकृति - यह दवा 30, 200, 1000 व उच्च शक्ति में अच्छी तरह से काम करती है। यह औषधि शीत प्रकृति की होती है । इसका सेवन चिकित्सक सलाह से ही करे । 


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