गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

कैन्थरिस ( CANTHARIS ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

कैन्थरिस ( CANTHARIS ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विश्लेषण करते हैं-

  • मूत्र मार्ग की शोथ तथा जलन   
  • अन्य रोगों के साथ मूत्र मार्ग की जलन 
  • जननेन्द्रिय सम्बन्धी निर्लज्जता 
  • जहरीले कीटों के विष से जलन व आग से जलने की जलन 
  • कैन्थरिस की प्रभाव शक्ति 

" कैन्थरिस की प्रकृति "

रोगी को गर्मी से , मलने से व लेटने से आराम मिलता हैं । जबकि पेशाब करते समय कष्ट, ठंडा पानी पीने से, जल की कल - कल की आवाज से व छूने से तकलीफे बढ़ जाती हैं । 

" मूत्र मार्ग की शोथ तथा जलन "

कैन्थरिस का सबसे प्रधान लक्षण मूत्र मार्ग की जलन हैं । यह दवा मूत्र संस्थान में तेजी से असर करती हैं, ऐसे रोग को जल्दी शांत कर देती हैं । मूत्राशय और प्रजनन अंगों में जलन होती हैं और उनमें सूजन आ जाती हैं।  व्यक्ति सेक्स संबंधी विचारों से परेशान रहता हैं । मूत्र संस्थान की इसी जलन के कारण मूत्राशय में दर्द भी होता हैं, बार - बार पेशाब आता हैं और मूत्राशय में असहनीय मरोड़ होती हैं । मूत्राशय में पेशाब करने से पहले , बीच में, और अंत में मूत्र प्रणाली में दर्द होता हैं, पेशाब बूंद - बूंद करके आता हैं । 

" अन्य रोगों के साथ मूत्र मार्ग की जलन "

मूत्र मार्ग की जलन कैन्थरिस का ' व्यापक लक्षण ' यह हम जानते हैं , इसलिए किसी अन्य रोग के साथ ये लक्षण हो तो इस औषधि से आराम होता हैं । जब कभी ब्रोकाइटिस के साथ रोगी को पेशाब अधिक आए और जलन भी हो तो  कैन्थरिस से अच्छा लाभ होता हैं और ब्रोकाइटिस भी ठीक हो जाता हैं । 

" जननेन्द्रिय सम्बन्धी निर्लज्जता "

जलन का एक स्वाभाविक परिणाम यह होता हैं कि रोगी सेक्स संबंधी विचारों से परेशान रहता हैं । हायोसाइमस , फॉसफोरस और सिकेल में भी रोगी सेक्स विचारों से परेशान रहता हैं ।  इसका कारण मूत्र प्रणाली की जलन होता हैं । कभी - कभी रोगी प्रेम के गन्दे गीत गाने लगता हैं , और जननेन्द्रिय  संबंधित ऐसी बातें करने लगता हैं कि कोई स्वस्थ व्यक्ति कभी ऐसी बातें नहीं करता । इन सब का कारण मूत्र संस्थान की गड़बड़ी होती हैं । जब किसी लड़की का ठंड लगने से मासिक धर्म में गड़बड़ी हो जाती हैं, तो उसके मन में विक्षिप्त अवस्था आ जाती हैं । जो इस दवा से दूर हो जाती हैं ।  

" जहरीले कीटों के विष से जलन व आग से जलने की जलन " 

जब कोई जहरीला कीड़ा काट लेता है तो उसके विष से त्वचा पर अत्यंत जलन होती हैं । यह जलन कैन्थरिस से एकदम दूर हो जाती हैं । और आग की जलन को भी दूर कर देती हैं ।  कैन्थरिस का प्रयोग बाहर और आन्तरिक में 30 या 200 शक्ति की कुछ मात्राएं दे देने से अच्छा लाभ होता हैं ।

" कैन्थरिस की प्रभाव शक्ति "

यदि त्वचा पर कैन्थरिस डाल दिया जाए , तो वहां एकदम छाले पड़ जाते हैं । छालों का एकदम पड़ना यह सिद्ध करता हैं कि यह औषधि तुरन्त प्रभाव डालती हैं । जो औषधि एकदम कुप्रभाव डालती हैं, वह शरीर को स्वस्थ करने में भी एकदम प्रभावशाली होती हैं । रोगों के आने व जाने की गति धीमी या तीव्र होती हैं ।  

" कैन्थरिस की शक्ति तथा प्रकृति "

बाहरी प्रयोग के लिए मूल अर्क  तथा आंतरिक प्रयोग के लिए 6 , 30, 200 शक्ति इस्तेमाल होती हैं। इस औषधि की प्रकृति शीत होती हैं।


रविवार, 4 अप्रैल 2021

कैनेबिस इंडिका ( CANNABIS INDICA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

कैनेबिस इंडिका ( CANNABIS INDICA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विस्तार पूर्वक विश्लेषण-

  • देश तथा काल का अतिरंजित दिखना 
  • मानसिक भ्रम  
  • रोगी का वाक्य समाप्त नहीं कर पाना  
  • खोपड़ी की हड्डी में तकलीफ
  • सुजाक की प्रथम अवस्था 

" कैनेबिस इंडिका की प्रकृति "

ठंडक व खुली हवा से रोगी को आराम मिलता हैं । जबकि प्रातःकाल को, तम्बाकू से , शराब से व पेशाब करते समय रोगी की तकलीफे बढ़ जाती हैं । 

" देश तथा काल का अतिरंजित दिखना " 

कैनेबिस इंडिका भांग का नाम हैं। अर्थात यह भांग से बनी औषधि हैं। इस औषधि का मन पर असीम प्रभाव पड़ता हैं। रोगी को समीप की चीजे मीलो दूर दिखती हैं, अभी अभी किया हुआ कार्य न जाने कब का किया हुआ प्रतीत होता हैं। मकान में बैठा हुआ भी कहेगा की आसमान पर बैठा हूँ। अभी अभी भोजन खाकर भी कहेगा की भोजन किए महीनों हो गए। एक गज़ को एक मील और एक मिनट को एक दिन महसूस करता हैं। देश तथा काल के विषय में उसकी धारणा अतिरंजित तथा भ्रममूलक हो जाती हैं । 

" मानसिक भ्रम " 

देश और काल के विषय में तो रोगी का भ्रम विशेष रूप का होता हैं । लेकिन इसके अलावा भी उसका सारा जीवन भ्रम में ही होता हैं । वह खुद को राजा , मसीहा या कोई महापुरुष समझता हैं । वह सोचने में असमर्थ होता हैं, कभी कहता है, कि मैं मर गया हू , मुझे लोग जलाने के लिए ले जा रहे हैं । कभी कहता है कि मैं उड़ रहा हूँ । ऐसे रोगी को कैनेबिस इंडिका ठीक कर देती हैं ।

" रोगी का वाक्य समाप्त नहीं कर पाना "

जब रोगी  कोई वाक्य शुरू करता हैं, और आधा वाक्य पूरा करने से बाद आधी वाक्य भूल जाता हैं । और वह सोचने लगता हैं, कि वह क्या कहना चाहता हैं । इस असमर्थता के कारण वह चिल्लाता भी हैं । वह इस औषधि को लगातार कई दिन तक लेने से ठीक हो जाता हैं । 

" खोपड़ी की हड्डी में तकलीफ " 

रोगी को ऐसा महसूस होता है कि उसकी खोपड़ी की हड्डी एक बार खुलती हैं , एक बार बंद होती हैं । इसके बाद सिर के दाई तरफ़ दर्द होने लगता हैं । ऐसे लक्षणों में कैनेबिस इंडिका लाभप्रद होती हैं।

" सुजाक की प्रथम अवस्था "

सुजाक की प्रथम अवस्था में रोगी का इलाज कैनेबिस इंडिका या कैनेबिस सैटाइवा से किया जा सकता हैं । पेशाब में पीला पस आता हैं और पेशाब करने के बाद बूंद - बूंद टपकता हैं । पेशाब करने से पहले , करते समय , और पेशाब कर लेने पर मूत्र प्रणालिका में जलन होती हैं । गुर्दे में भी हल्का - हल्का दर्द होता हैं । इन लक्षणों में कैनेबिस इंडिका से लाभ होता हैं । सुजाक में जब लिंग अपने आप उत्तेजित हो जाता हैं, तो रोगी को अत्यंत दर्द होता हैं । यह औषधि सुज़ाक के रोगी के लिए लाभप्रद होती हैं ।

" कैनेबिस इंडिका की शक्ति " 

यह औषधि मूल अर्क , 6 , 30 , 200 व उच्च शक्ति में उपलब्ध हैं ।


कैनेबिस सैटाइवा ( CANNABIS SATIVA ) के लक्षण, रोग व फायदें

कैनेबिस सैटाइवा ( CANNABIS SATIVA ) के लक्षण, रोग व फायदों का विस्तार से विश्लेषण -

" सुजाक मे फायदेमंद " 

सुजाक रोग में कैनेबिस इंडिका की अपेक्षा कैनेबिस सैटाइवा ज्यादा प्रभावशाली होती हैं । इसका मुख्य लक्षण यह है कि मूत्र प्रणाली अत्यन्त स्पर्श असहिष्णु हो जाती है , कपड़े का स्पर्श भी सहन नहीं कर पाती , रोगी स्वस्थ मनुष्य की तरह नहीं चल पाता । क्योंकि मूत्रनली की शोथ मूत्राशय तक पहुँच चुकी होती हैं । इसलिये टांगे चौड़ी करके चलता हैं, बार - बार पेशाब जाने की इच्छा होती हैं और पेशाब में खून आ जाता हैं । अत: गोनोरिया (सुज़ाक) के इलाज के लिये यह सर्वोत्कृष्ट औषधि हैं। खासकर जब शोथ की अवस्था में जो सुजाक की प्रथम अवस्था होती हैं। इन्द्रिय सूज जाती हैं, उसमें से मोटा , पीला स्राव आता हैं, जिससे पेशाब करना कठिन हो जाता हैं । ऐसे सुज़ाक का इलाज कैनेबिस सैटाइवा दवा से किया जाता हैं ।

" देश तथा काल का अतिरंजित दिखना " 

कैनेबिस सैटाइवा औषधि का मन पर असीम प्रभाव पड़ता हैं । रोगी को समीप की चीजे मीलो दूर दिखती हैं , अभी अभी किया हुआ कार्य न जाने कब का किया हुआ प्रतीत होता हैं । मकान में बैठा हुआ भी कहेगा की आसमान पर बैठा हूँ । अभी अभी भोजन खाकर भी कहेगा की भोजन किए महीनों हो गए । एक गज़ को एक मील और एक मिनट को एक दिन महसूस करता हैं । देश तथा काल के विषय में उसकी धारणा अतिरंजित तथा भ्रममूलक हो जाती हैं । 

" मानसिक भ्रम "

देश और काल के विषय में तो रोगी का भ्रम विशेष रूप का होता हैं । लेकिन इसके अलावा भी उसका सारा जीवन भ्रम में ही होता हैं । वह खुद को राजा , मसीहा या कोई महापुरुष समझता हैं । वह सोचने में असमर्थ होता हैं, कभी कहता है, कि मैं मर गया हू , मुझे लोग जलाने के लिए ले जा रहे हैं । कभी कहता है कि मैं उड़ रहा हूँ । ऐसे रोगी को कैनेबिस सैटाइवा ठीक कर देती हैं ।

" रोगी का वाक्य समाप्त नहीं कर पाना "

जब रोगी  कोई वाक्य शुरू करता हैं, और आधा वाक्य पूरा करने से बाद आधी वाक्य भूल जाता हैं । और वह सोचने लगता हैं, कि वह क्या कहना चाहता हैं । इस असमर्थता के कारण वह चिल्लाता भी हैं । वह कैनेबिस सैटाइवा को लगातार कई दिन तक लेने से ठीक हो जाता हैं । 

" खोपड़ी की हड्डी में तकलीफ " 

रोगी को ऐसा महसूस होता है कि उसकी खोपड़ी की हड्डी एक बार खुलती हैं , एक बार बंद होती हैं । इसके बाद सिर के दाई तरफ़ दर्द होने लगता हैं । ऐसे लक्षणों में कैनेबिस सैटाइवा लाभप्रद होती हैं।


शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

कैम्फोरा ( CAMPHORA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

कैम्फोरा ( CAMPHORA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का वर्णन -

  • हैजे की प्रथम अवस्था में व अन्य औषधियाँ 
  • त्वचा की शीत अवस्था  
  • त्वचा की शीत अवस्था में गर्मी के दौरे  
  • मासिक धर्म के समय ठंडा शरीर  
  • पेशाब की जलन में  
  • जीवन शक्ति का पतन

" कैम्फोरा की प्रकृति "

स्राव खुल कर जाने से और गर्मी से रोग के लक्षणों में कमी आती हैं। जबकि ठंडी हवा से, हरकत से और रात को रोग के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।

" हैजे की प्रथम अवस्था में व अन्य औषधियाँ " 

हैजे में सर्वप्रथम कय व दस्त के लक्षण प्रकट होते हैं और बाद में कमजोरी आती हैं। तो सबसे पहले कैम्फोरा औषधि प्रयोग की जाती हैं । इसका प्रभाव बहुत क्षणिक होता है , इसलिए शुरू में हर पांच मिनट में तब तक देते रहना चाहिए, जब तक शरीर में गर्मी न आ जाए । कैम्फोरा के अतिरिक्त हैजे की अन्य दो दवाएं हैं - क्यूप्रम और वेरेट्रम ऐल्बम । तीनों को विस्तार से समझते हैं -

>> हैजे में कैम्फोरा के लक्षण - हैजे में सबसे अधिक शीत कैम्फोरा के रोगी को लगती हैं । वह इतना ठंडा होता हैं, कि जैसे मरा पड़ा हो ।  कैम्फोरा के रोगी शीत लगती हैं , लेकिन फिर भी वह शरीर पर कपड़े बर्दाश्त नहीं कर पाता और उतार फेंकता हैं । ठंडा शरीर होने पर भी दरवाजे - खिड़कियां खुली रखना पसंद करता हैं । परन्तु कैम्फोरा के रोगी को बीच बीच में ऐंठन भी होती रहती हैं, जिसके कारण उसे दर्द होता हैं । और जब ये ऐंठन होती हैं, तब वह कपड़े ओढ़ना चाहता हैं और दरवाजे - खिड़कियां बन्द करना पसंद करता हैं ।  कैम्फोरा में खुश्क हैजा भी होता हैं, जिसमें शरीर ठंडा , रंग नीला पड़ जाता हैं और कय दस्त न के बराबर होते हैं ।  

>> हैजे मे क्यूप्रम के लक्षण - क्यूप्रम के हैजे में रोगी को ऐंठन ज्यादा होती हैं । इसमें हैजे के अन्य लक्षण तो होते हैं, लेकिन ऐंठन को प्रधान लक्षण  माना जाता हैं । रोगी इन ऐंठनों से चिल्लाने लगता हैं । ऐंठनों की प्रधानता में क्यूप्रम लाभप्रद होती हैं । 

>> हैजे में वेरेट्रम ऐल्बम के लक्षण - शरीर के स्रावों की प्रधानता का लक्षण वेरेट्रम ऐल्बम का हैं। वेरेट्रम ऐल्बम में अधिक दस्त, अधिक पसीना और अधिक कय होती हैं । इसके रोगी को गर्म बोतल और गर्म पानी अच्छा लगता हैं। 

" त्वचा की शीत अवस्था "

इस औषधि का एक अद्भुत लक्षण यह हैं कि सारा शरीर बर्फ की तरह ठंडा होता हैं। लेकिन फिर भी रोगी किसी भी प्रकार का कपड़ा शरीर पर बर्दाश्त नहीं कर सकता और उतार फेंकता हैं । यदि किसी भी बीमारी में ये लक्षण पाए जाए तो कैम्फोरा इस रोग को दूर कर देती हैं । 

" त्वचा की शीत अवस्था में गर्मी के दौरे "

कैम्फोरा के रोगी की त्वचा शीत प्रधान होने पर भी वह कपड़ा उतार फेंकता हैं। लेकिन जब उसका शरीर ठंडा हो रहा होता हैं , तो साथ ही उसे गर्मी का दौर भी पड़ता हैं , जिससे कि वह दरवाजे और खिड़कियां खोलने को कहे , वह इस गर्मी के दौर के कारण उन्हें बन्द कर देने और शरीर पर कपड़ा ओढ़ने को कहने लगता हैं । यह अवस्था भी शीघ्र ही समाप्त हो जाती हैं, और वह फिर शीत अवस्था में आ जाता हैं । 

" मासिक धर्म के समय ठंडा शरीर "

स्त्रियों में जब मासिक धर्म बन्द होने लगता हैं , तब उन्हें गर्मी लगती हैं और मुंह पर पसीना आ जाता हैं । उसे बंद कमरे में कष्ट होता हैं , वह खुला व हवादार कमरा पसन्द करती हैं। उन्हें जब शरीर ठंडा अनुभव होता हैं , तब शरीर को गर्म करने के लिए वे कपड़ा नहीं ओढ़ती  । ऐसी अवस्था में कैम्फोरा बहुत ही लाभप्रद औषधि हैं । 

" पेशाब की जलन में "

इसका रोगी पेशाब के लिए जोर लगाता हैं , लेकिन पेशाब नहीं निकलता । क्योंकि मुत्राशय के मुख में ऐंठन होती हैं , इस कारण पेशाब में असमर्थता होती हैं । पेशाब बूंद बूंद कर आता हैं, जिसमें हल्के खून का मिश्रण होता हैं । इन लक्षणों में कैम्फोरा से लाभ होता हैं । 

" जीवन शक्ति का पतन "

जब जीवन शक्ति की पतन अवस्था आ जाती हैं, तब शरीर बिल्कुल ठंडा पड़ जाता हैं , मनुष्य मरणासन्न अवस्था में हो जाता हैं, नाड़ी धीमी पड़ जाती हैं , शरीर का तापमान अत्यंत नीचे चला जाता हैं और ब्लड प्रेशर कम हो जाता हैं।  ऐसी अवस्था प्राय: ऑपरेशन के बाद या हैजे की हालत में होती हैं।  इस अवस्था से बाहर रोगी को कैम्फोरा निकाल सकती हैं । 

" कैम्फोरा औषधि के अन्य लक्षण "

जुकाम , इन्फ्लुएंजा में, ठंडे , चिपचिपे व कमजोर करने वाले पसीने में, हृदय में छाती के ऊपर के हिस्से में घबराहट और  सांस लेने में कठिनाई में  कैम्फोरा लाभप्रद करती हैं ।

" कैम्फोरा की शक्ति तथा प्रकृति "

कैम्फोरा स्पिरिट को सूंघना या मदर टिंचर की 1 से 5 बूंद बार - बार लेने पर अधिक लाभ करती हैं । इसकी 30 व  उच्च शक्ति अधिक लाभप्रद होती है । यह औषधि शीत प्रकृति की हैं ।


गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

कैलकेरिया सल्फ्यूरिका ( CALCAREA SULPHURICA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

कैलकेरिया सल्फ्यूरिका ( CALCAREA SULPHURICA ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विश्लेषण-

" कैलकेरिया सल्फ्यूरिका की प्रकृति "  

ठंडे पानी से स्नान करने से, खुली हवा से , फोड़े - फुंसी पर सेक करने से रोग के लक्षणों में कमी आती हैं। जबकि स्पर्श से, नम हवा से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।

" शरीर में कहीं भी पस पड़ जाना "

शरीर के किसी स्थान पर पस पड़ जाना इस औषधि का मुख्य लक्षण हैं । जब घाव फूट जाए, उसमें से लगातार पस निकलता रहे और वह ठीक नहीं हो रहा हो तब कैलकेरिया सल्फ्यूरिका लाभप्रद होती हैं ।  जब घाव से पस खुद मार्ग बनाकर निकले तब कैलकेरिया सल्फ्यूरिका कारगर होती हैं । 

" कैलकेरिया और सल्फर दोनों के लक्षण मिलने पर "

यह औषधि कैलकेरिया तथा सल्फर के मिश्रण से बनी हैं , इसलिए इन दोनों के लक्षण मिले - जुले होते हैं और कनफ्यूजन की स्थिति हो तो कैलकेरिया सल्फ्यूरिका का प्रयोग किया जाता हैं ।   

" ब्राइट्स रोग में फायदेमंद "

जिसके गुर्दे में दिन रात दर्द रहता हो, उसके पेशाब में पस आती हो और लम्बे समय से आ रही हो तो यह ब्राइट्स रोग होता हैं । इसमें कैलकेरिया सल्फ्यूरिका देने से लाभ होता हैं ।

" कैलकेरिया सल्फ्यूरिका की शक्ति तथा प्रकृति "

कैलकेरिया सल्फ्यूरिका की उच्च शक्ति अधिक लाभप्रद होती हैं। यह ऊष्ण प्रकृति की औषधि हैं ।


बुधवार, 31 मार्च 2021

कैलकेरिया फ्लोरिका ( CALCAREA FLUORICA ) के व्यापक लक्षाण, मुख्य रोग व फायदें

कैलकेरिया फ्लोरिका ( CALCAREA FLUORICA ) के व्यापक लक्षाण, मुख्य रोग व फायदों का विश्लेषण-

  • गिल्टियों की गाठों में फायदेमंद  
  • ट्यूमर में लाभप्रद 
  • मोतियाबिंद में लाभप्रद  
  • टांसिल , एडेनॉयड , हड्डी के बढ़ने , गलने - सड़ने आदि में फायदेमंद 

गिल्टियों की गांठों में फायदेमंद - इस औषधि का विशेष गुण यह है कि कहीं पर भी कड़ापन, गांठ बन जाना या हड्डी उभर आती हैं तो यह आश्चर्यजनक परिणाम देती हैं । जब स्त्रियों के स्तनों में गांठे पड़ जाती हैं , तो उन्हें यह ठीक कर देती हैं । 

ट्यूमर में लाभप्रद - यह औषधि ट्यूमर को ठीक करने में कारगर हैं । इस औषधि का बायोकैमिक तथा होम्योपैथिक दोनों दृष्टियों से ट्यूमर के इलाज के लिए किया जाता हैं । जब साइलीशिया से फायदा नहीं होता तब इससे लाभ हो जाता हैं । 

मोतियाबिंद में लाभप्रद - जब मोतियाबिंद में अंदर का लैंस अपारदर्शी हो जाता हैं । यह भी एक तरह का लेन्स का कड़ा पड़ जाना हैं । कई बार इस औषधि से मोतियाबिन्द ठीक हो जाता हैं । 

टांसिल , एडेनॉयड , हड्डी के बढ़ने , गलने - सड़ने आदि में फायदेमंद - जब टांसिल सख्त हो जाए या एडेनॉयड हो जाए तो इस सख्ती को दूर करने में यह औषधि लाभकारी होती हैं । प्राय: देखा जाता हैं कि जब बैराइटा कार्ब टॉन्सिल और एडेनॉयड को ठीक नहीं कर पाती तो यह ठीक कर देती हैं । दांतों में अगर एनैमल की कमी हो तो यह दांतों पर एनैमल चढा देती हैं । कई हड्डी रोगों को ठीक करती हैं ।  जब किसी स्थान की हड्डी के बढ़ जाने या उसके गलने - सड़ने पर यह औषधि लाभप करती हैं । जब किसी स्त्री के नीचे के जबड़े की हड्डी सड़ जाती हैं और किसी अन्य औषधि से ठीक नहीं हो तो  कैलकेरिया फ्लोरिका 6x शक्ति को कुछ दिन लगातार लेने से फायदा हो जाता हैं । 

कैलकेरिया फ्लोरिका की शक्ति तथा प्रकृति - यह  बायोकैमिक दृष्टि से 3x , 6x , 12x में  और होम्योपैथिक  30 , 200 शक्ति में उपलब्ध है । यह शीत प्रकृति की औषधि हैं ।


कैलकेरिया फॉसफोरिका ( CALCAREA PHOS ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

कैलकेरिया फॉसफोरिका ( CALCAREA PHOS ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विस्तार पूर्वक वर्णन-

  • बच्चों का सम्पूर्ण विकास   
  • बढ़ते बच्चों की टांगों में दर्द 
  • बच्चो को ऐंठन  
  • मानसिक दुख व निराशा
  • प्रथम मासिक धर्म  की तकलीफें 
  • कैलकेरिया कार्ब तथा कैलकेरिया फॉस की तुलना 

बच्चों का सम्पूर्ण विकास - इस औषधि में कैल्शियम और फॉसफोरस का मिश्रण होता हैं । दोषपूर्ण शारीरिक विकास के लिए यह महाऔषधि हैं । इसका बच्चों के शारीरिक विकास के लिए विशेष उपयोग होता हैं । जिन बच्चों के गिल्टिया बन जाती हैं , दांत ठीक समय पर नहीं निकलते , जिनकी अस्थियों का पूर्ण विकास नहीं होता ,  अच्छा खाने - पीने पर भी भोजन का नहीं लगना , कद नहीं बढ़ना , पेट बढ़ जाना, सिर की खोपड़ी  पिलपिली होना, हड्डियाँ का नही जुड़ना और इतनी पतली गर्दन जो सिर को नहीं थाम पाती, ऐसे बच्चों के लिए यह औषधि संजीवनी बूटी का काम करती हैं । उनके शरीर के अणुओं में नई शक्ति का संचार कर उन्हें स्वास्थ्य प्रदान करती हैं । यदि बच्चे की बढ़ती उम्र के साथ शारीरिक व मानसिक विकास नहीं होता हैं, तो यह औषधि रामबाण हैं ।  इस प्रकार का बच्चा पतला व चपटा होता हैं, जिसकी छाती की हड्डियों को गिना जा सकता हैं । 

बढ़ते बच्चों की टांगों में दर्द - बढ़ती आयु के बच्चों की टांगों या किसी अन्य अस्थि में जब दर्द होता हैं, तो कैलकेरिया फॉसफोरिका उसे शांत कर देती हैं । 

बच्चो को ऐंठन - बच्चों को अगर ऐंठन पड़ने लगे तो इस औषधि के प्रयोग से बेहतर लाभ होता हैं । परन्तु इस औषधि का उपयोग ऐंठन शांत हो जाने के बाद करे । 

मानसिक दुख व निराशा - प्रेम वियोग से, किसी दुखद समाचार से या किसी अन्य प्रकार की निराशा के कारण उत्पन्न रोगों में यह औषधि लाभप्रद होती हैं । 

प्रथम मासिक धर्म की तकलीफें - युवतियों के लिए कैलकेरिया फॉसफोरिका अति उत्तम औषधि हैं । जब नवयुवतियाँ यौवन में प्रवेश करती हैं, तब उनका मासिक धर्म ठीक समय पर शुरु नहीं होता हैं, तो यह औषधि सब ठीक कर देती हैं । कई लडकिया प्रथम मासिक धर्म में ठंड खा जाती हैं, जिससे उन्हें मासिक धर्म काल में पीड़ा होती हैं । अगर इस हालत को ठीक समय पर न सुधारा जाए , तो यह कष्ट उम्र भर रह सकता हैं । इस औषधि से इस कष्ट शुरु में ही ठीक किया जा सकता हैं । यदि किसी माता को दो - तीन ऐसे बच्चे हो चुके हैं, जिनका शरीर कैलकेरिया फॉसफोरिका का हैं । अगर ऐसी माता को गर्भावस्था में ही कैलकेरिया फॉसफोरिका दे दिया जाए, तो उसका बच्चा रोग मुक्त व स्वस्थ पैदा होगा । 

कैलकेरिया फॉसफोरिका की शक्ति तथा प्रकृति - बायोकैमिक में 1x से 3x व होम्योपैथिक में उच्च शक्ति अधिक लाभप्रद होती हैं । यह शीत प्रधान औषधि हैं ।


मंगलवार, 30 मार्च 2021

कैलकेरिया कार्बोनिका ( CALCAREA CARB ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग तथा फायदें

कैलकेरिया कार्बोनिका ( CALCAREA CARB ) के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग तथा फायदों का विश्लेषण -

  • थुलथुलापन, दुर्बलता, थोड़े श्रम से थक जाना, अस्थियों का अपूर्ण विकास 
  • पेट व सिर बड़ा और गर्दन व टांगे पतली 
  • शरीर व पांव ठंडा परन्तु सिर पर अधिक पसीना  
  • शरीर व स्रावों से खट्टी बदबू 
  • शारीरिक व मानसिक दुर्बलता 
  • मासिक धर्म की अनियमितता 
  • रोगी शीत प्रधान व आराम पसन्द
  • बच्चों के दाँत निकलते समय के रोग 
  • रोगी को कण्ठमाला की प्रकृति

कैलकेरिया कार्बोनिका की प्रकृति - गर्म हवा रोग के लक्षणों में कमी आती हैं। जबकि ठंड , ठंडी हवा से, शारीरिक श्रम से, मानसिक श्रम से बढ़ना चढ़ाई में चढ़ने से व बच्चों के दांत निकलने से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।

थुलथुलापन, दुर्बलता, थोड़े श्रम से थक जाना, अस्थियों का अपूर्ण विकास - बच्चा के जब दांत निकल रहे होते हैं, तभी उन्हें देखकर पहचाना जा सकता हैं कि बड़ा होकर उसके शरीर की रचना कैसी होगी । अगर उसका शरीर भोजन तत्वों से लाइम समीकरण नहीं कर रहा , तो उसकी हड्डियों का विकास ठीक नहीं हो पाएगा । हड्डियों की रचना से कहा जा सकता है कि उनका नियमित विकास नहीं हो रहा । किसी अंग में हड्डियां पतली , तो किसी में टेढ़ी-मेढ़ी दिखाई देती हैं ।  टाँगें पतली , मेरुदण्ड टेढ़ा , कमजोर हड्डियां की ऐसी हालत होती है उस बच्चे विकास ठीक नहीं हो पाता ।  बच्चें की जीवनी शक्ति में कोई निर्बलता होती हैं, जिसे दूर किए बिना बच्चे का विकास हो पाता ।  इस प्रकार के स्थूल , थुलथुल , कमजोर , अस्थियों के टेढ़े - मेढ़े व्यक्ति या बच्चा हो , वह बचपन से इन लक्षणों को लेकर बड़ा  हुआ हो तो कैलकेरिया कार्बोनिका उसे ठीक कर उसकी शरीर की रचना को बदल देती हैं । आजकल लड़के लड़कियां पतला होने की कोशिश करते हैं । क्योंकि इसमे वे सुन्दरता और मोटापे के रोगों देखते हैं ।  अगर उसके शरीर की रचना कैलकेरिया की है , तो उचित शक्ति की कैलकेरिया कार्बोनिका देने से उनकी मनोकामना पूरी जाती हैं । यदि कैलकेरिया कार्बोनिका माता को गर्भावस्था में दी जाए , तो बच्चों में होने वाली इन परेशानियों से बचा सकता हैं और सुदृड़ पैदा होगा । 

पेट व सिर बड़ा और गर्दन व टांगे पतली - ऊपर जो कुछ भी कहा गया हैं, उससे स्पष्ट होता हैं कि जिस व्यक्ति के विकास में अस्थियों और मांसपेशियों का पूर्ण विकास नहीं होगा तो उसकी क्या स्थिति होगी । उस बालक या युवा का स्थिति - बड़ा सिर , बड़ा पेट, पतली गर्दन और पतली टांगे जिससे उन्हें चलने - फिरने में दिक्कत होती हैं। 

शरीर व पांव ठंडा परन्तु सिर पर अधिक पसीना - इसके रोगी का विशेष लक्षण यह है कि उसे अत्यंत सर्दी लगती हैं , शरीर ठंडा रहता है , लेकिन सोते समय पसीना अधिक आता हैं । पसीने की मात्रा सिर पर अधिक होती हैं।  साथ ही कैलकेरिया का विलक्षण लक्षण यह भी हैं कि इसके रोगी को ठंडे कमरे में भी उसे पसीना आता हैं और पांव बर्फ जैसे ठंडे होते हैं । कैलकेरिया से शरीर की जीवनी शक्ति का सुधार तो होता ही हैं, और इसके साथ ही जिन रोगों का हमें पता नही , वह भी ठीक हो जाते हैं । कैलकेरिया के रोगी के शरीर में ठंड कभी सिर में, कभी पाँव में, कभी पेट में और कभी जांघों में महसूस होती हैं और भिन्न - भिन्न अंगों में पसीना भी आता हैं ।  

शरीर व स्रावों से खट्टी बदबू - कैलकेरिया के रोगी के शरीर व स्त्रावों से खट्टी बदबू आती हैं । उसके पसीने , कय तथा दस्त में खट्टी बदबू आती हैं । कई बार किसी मोटे थुलथुले व्यक्ति में पसीने से खट्टी बदबू आती रहती हैं, तो वह कैलकेरिया का रोगी हैं । 

शारीरिक व मानसिक दुर्बलता - जिस प्रकार रोगी का शरीर दुर्बल होता हैं , उसी प्रकार उसका मन भी दुर्बल होता हैं । देर तक मानसिक श्रम नहीं कर सकता । शारीरिक श्रम से भी वह तुरन्त थक जाता हैं और पसीने से भीगा रहता हैं । अत्यधिक चिन्ता, व्यापारिक कार्यों में व्यस्तता तथा मानसिक उत्तेजना से जो रोग उत्पन्न होते हैं, उनमें यह औषधि लाभप्रद होती हैं ।  कैलकेरिया में निम्न मानसिक  लक्षणों पर भी ध्यान देना आवश्यक हैं- 

>> मानसिक ह्रास - रोगी समझता हैं कि उसका मानसिक ह्रास हो रहा हैं । वह सोचता है , कि वह पागलपन की तरफ बढ़ रहा हैं । वह मानने लगता है कि लोग भी उसके बारे में ऐसा ही सोचते हैं । लोग उसकी तरफ इसी सन्देह से देखते हैं और वह भी उनकी तरफ इसी संदेह से देखता हैं। वह सोचता हैं कि लोग इसके बारे उससे कह क्यो नही देते । यह विचार हर समय दिन - रात उसके मन में रहता हैं, और जिसके कारण वह सो नहीं पाता । 

>> छोटे - छोटे विचार आना - कैलकेरिया के रोगी के मन में छोटे - छोटे विचार आते रहते हैं । उसका मन छोटी - छोटी बातों से इतना जकड़ जाता हैं, कि उनसे छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता हैं।  उसका मानसिक स्तर बिगड़ चुका होता है । वह बुद्धि के स्थान पर मनोभाव से काम लेता है । बहुत कोशिश करके अगर वह अपने मन को उन छोटे - छोटे विचारों से अलग कर सोने की कोशिश करता हैं , आंखें बंद करने की कोशिश करता हैं , लेकिन आंखें बंद नहीं हो पाती , वह एकदम उत्तेजित अवस्था में आ जाता हैं और ये विचार उसे इतना परेशान कर देते हैं कि वह सो नहीं पाता ।

>> दौड़ने और चिल्लाने की इच्छा - जिन लोगों का मस्तिष्क चिन्ता की अति तक पहुँच जाता हैं , जो गृहस्थी में किसी दुखद घटना से अत्यन्त पीड़ित होते हैं, उनका हृदय टूट जाता हैं । इस प्रकार की चिन्ता व्यापारिक भी हो सकती है । रोगी घर में आगे - पीछे चलता - फिरता हैं , उसे शान्ति नही मिलती । मन करता हैं कि खिडकी से कूदकर प्राण दे दे । यह एक प्रकार का हिस्टीरिया हैं, जिसे कैलकेरिया ठीक कर देता है ।

>> सब कामकाज छोड़कर बैठ जाना - कैलकेरिया का रोगी अपनी मानसिक दुर्बलता के कारण अपना सब काम धंधा छोड़ कर बैठ जाता हैं । कितना ही अच्छा व्यापार क्यों न हो , उसे अपने काम में रुचि नहीं होतहोना

मासिक धर्म की अनियमितता - मासिक धर्म की  अनियमितता में तीन बातों को ध्यान में रखना होता हैं । जैसे- समय से पहले, अधिक खून, और ज्यादा दिनों तक होना । मासिक धर्म  प्राय: हर तीसरे सप्ताह शुरू होती है , रुधिर की मात्रा बहुत अधिक होती है , और समाप्त होते हुए भी एक सप्ताह ले लेती हैं । परंतु मासिक धर्म में इन लक्षणों के साथ कैलकेरिया के अन्य लक्षण भी होना जरूरी हैं ।  

रोगी शीत प्रधान व आराम पसन्द - कैलकेरिया का रोगी शीत प्रधान होता हैं । उसे ठंडी हवा पसंद नहीं आती । आंधी - तूफान , सर्दी का मौसम उसके रोग को बढ़ा देते हैं । वह शरीर को गर्म रखने के लिए कपड़े लपेट कर रखता हैं और दरवाजे - खिड़कियां बंद रखना चाहता हैं ।  ठंडा पन और कमजोरी उसका चरित्रगत लक्षण हैं । वह शीत प्रधान होने के साथ-साथ आराम पसंद होता हैं । देखने को वह मोटा ताजा,  थुलथुला, फूला हुआ चेहरा होता हैं, परन्तु शारीरिक श्रम नहीं कर पाता है । अगर थोडा - सा भी परिश्रम करता हैं , तो सिर दर्द , बुखार हो जाता हैं । ज्यादा चलना-फिरना , मेहनत करना व बोझ उठाना रोगों को आमंत्रण देना हैं ।  

बच्चों के दाँत निकलते समय के रोग - कैलकेरिया के लक्षणों में बच्चे की शिकायतों को नहीं भूला जा सकता । बच्चों के दांत निकलते समय अधिक कष्ट से गुजरता हैं । दांत निकलते समय वह दूध हज़म नही कर सकता और जमे हुए दही की तरह उल्टी कर देता हैं , जिसमें से खट्टी बदबू आती हैं । दांत निकलते समय बच्चों को दस्त होने लगते हैं , जो फटे हुए दूध की तरह होता हैं और उसमें भी खट्टी बदबू आती हैं । दांत निकलते समय बच्चों को खांसी की शिकायत भी होती हैं।  इन तीनो शिकायतों में अगर बच्चे को सोते समय सिर पर पसीना आता हो , तो कैलकेरिया से ये रोग ठीक हो जाते हैं । 

रोगी को कण्ठमाला की प्रकृति - कैलकेरिया के रोगी की गर्दन के चारों ओर गिल्टियाँ फूली होती हैं । ये गिल्टियाँ शरीर के अन्य अंगों मे भी होती हैं । गिल्टियों पर इस औषधि का असर कारगर होता है । पेट की गिल्टियों सख्त होना टी ० बी ० का लक्षण हो सकता हैं । कभी - कभी इन गिल्टियों का आकार मुर्गी के अंडे जितना हो जाता हैं । किसी भी अंग में गिल्टियों के साथ कैलकेरिया के अन्य लक्षणों का होना आवश्यक हैं ।

कैलकेरिया कार्बोनिका औषधि के अन्य लक्षण-

>> कैंसर - यदि रोगी में कैलकेरिया के लक्षण हैं और वह कैंसर से पीड़ित हैं। यदि कैंसर का रोगी सवा साल जी सकता हैं , तो कैलकेरिया देने से वह पांच साल तक जी सकता हैं ।  

>> गहरे घाव - यदि शरीर के किसी भी अंग में गहरा घाव हो और कैलकेरिया के लक्षण हो , तो वह घाव में पस पड़ जाने पर भी कैलकेरिया से ठीक हो जाएगा । 

>> अंडा खाने की इच्छा और दूध से अरुचि - कैलकेरिया में अंडा खाने की प्रबल इच्छा होती हैं , जबकि दूध पीने से नफरत करता हैं । 

>> बच्चे द्वारा स्तनपान करने पर मासिक धर्म होना - कैलकेरिया का एक विचित्र लक्षण यह है कि जब बच्चा मां का स्तनपान करने लगता है , तब मासिक धर्म जारी हो जाता है । थोड़ी सी मानसिक उत्तेजना में यह मासिक स्राव जारी होने लगता हैं ।

>> गठिया या वात रोग - ठंड लगने पर जोड़ों का दर्द बढ़ जाना इस औषधि लक्षण हैं । पांव ठंडे होते हैं , जैसे गीली जुराब पहनी हो । सोते समय पैरों पर अधिक गर्म कपड़ा डालना पड़ता हैं । जब पैर गर्म हो जाते हैं , तब उसमें जलन होने लगती हैं और रोगी उन्हें बिस्तर से बाहर निकाल देता हैं ।  

कैलकेरिया कार्बोनिका की शक्ति तथा प्रकृति - कैलकेरिया कार्बोनिका अनेक रोग साधक और दीर्घकालिक औषधि हैं । यह 6, 12, 30 , 200 व अधिक शक्ति में उपलब्ध हैं । यह शीत प्रधान औषधि हैं ।


गुरुवार, 25 मार्च 2021

कैलेडियम ( CALADIUM ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग तथा फायदें

कैलेडियम ( CALADIUM ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग तथा फायदों का विश्लेषण -

  • अत्यन्त भुलक्कड़ 
  • नपुंसकता में भी सहवास की तीव्र इच्छा 
  • स्त्री जननांग में असहनीय खुजली
  • मीठा पसीना, पसीने के बाद अच्छा लगना
  • धूम्रपान की आदत से मुक्ति

अत्यन्त भुलक्कड़ - इसका रोगी अत्यन्त भुलक्कड़ होता हैं, जो काम कर चुका हैं, सोचने लगता हैं, कि उसमे वह किया हैं या नहीं। जिस चीज़ पर निश्चय करना हो उसे बार - बार जाकर , देखकर , हाथ लगाकर निश्चय करता हैं, और वापस लौटने पर फिर अनिश्चित हो जाता हैं । ऐसा तो तब होता है , जब सब कुछ उसने स्वय किया हैं । कैलेडियम इस प्रकार की मन की अनिश्चित अवस्था व भुलक्कड़पन में लाभप्रद होती हैं । इस प्रकार की अवस्था पागलपन तक भी पहुंच सकती हैं । रोगी का ऐसी हालत में पहुँच जाने पर वह पूरे दिन यही सोचता रहता हैं, कि जो काम वह कर चुका हैं या जो हो जाने चाहिए थे , वे उसने किए या नहीं किए , वे हुए या नहीं हुए ।  जितना ही वह किसी विषय पर ध्यान केन्द्रित करना चाहता हैं, लेकिन उतना ही उस पर केन्द्रित नहीं हो पाता हैं। 

नपुंसकता में भी सहवास की तीव्र इच्छा - मन की इस प्रकार की दुर्बलता प्राय: व्यभिचारियों और हस्तमैथुन करने वालों में भी पायी जाती हैं । रोगी की स्त्री प्रसंग की उत्कृष्ट इच्छा होती हैं, परन्तु वह मैथुन में असमर्थ होता हैं । स्त्री का आलिंगन करने पर भी उसमें उत्तेजना नहीं आती। ऐसे दुर्व्यसनी लोग आती - जाती महिलाओं की ओर ताकते हैं, और उनका वीर्य रिसता रहता हैं। ऐसे रोगियों का इलाज न करना ही ठीक होता हैं, क्योंकि जब तक वे स्वयं इस रोग से मुक्त न होना चाहें तब तक वह ठीक नहीं हो सकता। ऐसे दुर्व्यसनी, व्यभिचारी विचारों से ग्रस्त लोग रात भर उलटा पलटा करते हैं। अर्ध - निंद्रमुक्ति्था में उत्तेजना रहती है , परन्तु जागते ही इन्द्रिय शिथिल हो जाती हैं। पुरुषों की जननेन्द्रिय शिथिलता को कैलेडियम, पिकरिक ऐसिड, सिलेनियम और थूजा ठीक कर देती हैं । 

स्त्री जननांग में असहनीय खुजली - इस औषधि का एक विशेष लक्षण स्त्री के जननांगों की खुजली हैं । प्राय गर्भावस्था के दौरान ऐसा होता हैं । इतनी खुजली होती है, कि वह सो नहीं सकती । इस खुजली के कारण उसकी काम चेष्टा बढ़ जाती हैं , तथा वह शरीर व मन से कमजोर हो जाती हैं । 

मीठा पसीना, पसीने के बाद अच्छा लगना - रोगी को मीठा पसीना आता है । यहाँ तक कि मक्खियां उस पर मिठास के लिये उसकी तरफ खिंची आती हैं । पसीना आने से के बाद रोगी को आराम मिल जाता हैं । 

धूम्रपान की आदत से मुक्ति - कैलेडियम दवा उन लोगों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि यह धूम्रपान की इच्छा के प्रति अरुचि पैदा कर देती हैं , तम्बाकू खाने की आदत को भी दूर कर देती है ।  

कैलेडियम की शक्ति - यह 6 , 30 , 200 व अधिक शक्ति में उपलब्ध हैं । सेवन में दवा की शक्ति का प्रयोग चिकित्सक की सलाह से ही करे ।


कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस ( CACTUS GRANDIFLORUS ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदें

कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस ( CACTUS GRANDIFLORUS ) औषधि के व्यापक लक्षण, मुख्य रोग व फायदों का विस्तार पूर्वक विश्लेषण -

  • ऐसा अनुभव जैसे हृदय को मुट्ठी से जल्दी - जल्दी दबाया और छोड़ा जा रहा हैं   
  • किसी भी अंग में जकड़न का अनुभव 
  • वात रोग या गठिया में जकड़न का अनुभव 
  • बायीं बाह का सुन्न हो जाना 
  • रक्त संचय के कारण विभिन्न अंगों से खून आना  
  • पेट, आंतो, हाथों, टांगों व सिर में स्पन्दन

कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस की प्रकृति - खुली हवा से रोग में लक्षणों में कमी आती हैं। जबकि प्रातः दोपहर तथा सायं काल में, बायीं करवट लेटने से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती हैं।

ऐसा अनुभव जैसे हृदय को मुट्ठी से जल्दी - जल्दी दबाया और छोड़ा जा रहा हैं - कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस हृदय रोग की प्रधान दवा हैं । रोगी को अनुभव होता हैं, कि उसका हृदय मुट्ठी में दबाया हुआ हैं, और जल्दी - जल्दी उसे दबाया और छोड़ा जा रहा हैं । हृदय में ऐसा दर्द होता हैं, कि वह समझता है कि उसका रोग असाध्य हैं । उसे मृत्यु डर लगने लगता हैं । रोगी उदास, अकेला व चुपचाप बैठा रहता हैं और किसी से बात नहीं करता । कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस में हृदय रोगी प्राय: रोया करता हैं और घुटन महसूस करता हैं । दिल के इस प्रकार के कष्ट में कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस औषधि उपयुक्त हैं। 

किसी भी अंग में जकड़न का अनुभव - जकड़न का अनुभव सिर्फ हृदय तक सीमित नहीं रहता हैं । रोगी किसी भी अंग में जकड़न अनुभव करे, तो कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस ही उत्तम दवा हैं । रोगी को अनुभव होता हैं, कि उसकी छाती लोहे की जंजीर से जकड़ी हुई है और सिर पर भारी बोझ रखा हो । यह जकड़न हृदय और छाती के अतिरिक्त मूत्राशय , गुदा , जरायु और योनि आदि किसी भी अंग में हो सकती हैं । हृदय की जकड़न , सिर का बंधे होने का अनुभव , छाती में वजन जिससे सांस लेने में कठिनाई , गले में जकड़न व ऐंठन तथा जरायु में ऐसी जकड़न कि मैथुन न कर सके।  इन सभी अंगों के जकड़न में कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस  उपयोगी औषधि हैं । 

वात रोग या गठिया में जकड़न का अनुभव - वात रोगों में रोगी को जोड़ों में ऐसे अनुभव होता हैं , मानो की पट्टी बंधी हुई हैं । इस प्रकार के अनुभव में जकड़न और दबाव महसूस होता हैं और दर्द की अनुभूति होती हैं । इस प्रकार के जोड़ों के जकड़न में कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस लाभप्रद होती हैं।

बायीं बांह का सुन्न हो जाना -  हृदय के रोगों से बायीं बांह में ऐंठन और सुन्नपन आ जाता हैं । जो लोग गठिया या हिस्टीरिया से ग्रसित होते हैं, उनमें भी बायीं बांह में सुन्नपन के लक्षण पाए जाते हैं । बायीं बांह के सुन्नपन में कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस उपयोगी दवा हैं । 

रक्त संचय के कारण विभिन्न अंगों से खून आना - हृदय के रोगों से रक्त संचार विघटित हो जाता हैं। इस प्रकार अधिक रक्त संचय के कारण भिन्न - भिन्न अंगों से रक्त बहने लगता हैं । सिर में रक्त का संचय इतना हो जाता हैं, कि नाक से नकसीर और खांसने पर गले से खून आ जाता हैं । इनके अलावा जरायु व मूत्राशय से पेशाब में भी खून आ जाता हैं । बवासीर में भी मस्से खून से भर कर बड़े हो जाते हैं, इसलिये कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस खूनी बवासीर की भी महत्वपूर्ण दवा हैं । 

पेट, आंतो, हाथों, टांगों व सिर में स्पन्दन - पेट में , आंतों में, हाथों में , टांगों में और सिर में हृदय की नाड़ी का स्पन्दन अनुभव होना कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस औषधि का विचित्र लक्षण हैं । 

कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस औषधि के अन्य लक्षण - 

>> ग्यारह बजे रोग में वृद्धि -  प्रातः या सायं व दोपहर ग्यारह बजे रोगी के लक्षण बढ़ जाते हैं । छाती पर वजन की शिकायत होती हैं, ज्वर आता हैं या सुबह - शाम  ठंड सताने लगती हैं । 

>> मूत्र अवरोध - मूत्राशय में ऐसा संकुचन होता हैं, कि पेशाब नहीं निकलता हैं । कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस  में रक्त के थक्के आसानी से बन जाते हैं । शरीर में रक्त का संचार इतने जल्दी थक्कों में जम जाता हैं, कि रक्त संचार रूक जाता हैं । यदि मूत्राशय में रक्तस्राव हो जाए , तो उसके थक्के जम कर मूत्र मार्ग को रोक देते हैं, जिससे रोगी का मूत्र रूक जाता हैं ।

>> मासिक धर्म का कष्ट - मासिक धर्म के समय तंदुरुस्त व हृष्ट पुष्ट स्त्री का जरायु मार्ग इन रक्त के थक्कों से रुक जाता हैं और इन्हे बाहर धकेलने के लिए जरायु में ऐंठन पैदा हो जाती हैं , जो प्रजनन के समय के कष्ट के समान होती हैं । रोगिणी दर्द से चिल्लाती हैं और जब तक रक्त के थक्के बाहर निकल नहीं जाते तब तक उसे चैन नहीं पड़ता । अगर यह अवस्था गठिये के रोगी में हो तो कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस ही इस तकलीफ को दूर कर सकती हैं । ध्यान रखे कि कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस मुख्य तौर पर हृदय रोग की औषधि हैं और इसलिए रक्त से संबंधित रोगों में लक्षणों के अनुसार इसका प्रयोग होता हैं । 

कैक्टस ग्रैन्डीफ्लोरस की शक्ति तथा प्रकृति - सह औषधि 6 , 30 , 200 व अधिक शक्ति में उपलब्ध हैं । यह ऊष्ण प्रधान औषधि हैं ।